श्रद्धांजलि : मौन हुई एक मधुर आवाज, संगीत प्रेमियों के दिलों में हमेशा जिन्दा रहेंगे भजन गायक कैलाश जी - Nidar India

श्रद्धांजलि : मौन हुई एक मधुर आवाज, संगीत प्रेमियों के दिलों में हमेशा जिन्दा रहेंगे भजन गायक कैलाश जी

 

बीकानेर, निडर इंडिया न्यूज। 

“क्या भुलिया दिवाने, दुनिया में सार नहीं…दिन चार का तमाशा…भजन की पंक्तियों को साकार करते हुए मधुर आवाज के धनी भजन गायक कैलाश जी रंगा हमेश-हमेशा के लिए परमब्रह्म में लीन हो गए। कैलाश रंगा वो शख्सियत थे, जो हर आयुवर्ग के लोगों के साथ जल्द ही घुल-मिल जाते, हर किसी को अपना बना लेते थे।

कहते है होनी को कोई टाल नहीं सकता, किस समय में काल का क्या चक्र चलता है, ईश्वर को छोड़कर किसी नहीं पता। इसी कालचक्र ने दो दिन पूर्व बीकानेर के संगीत प्रेमियों को छोड़कर एक सरीले स्वर साधक कैलाश जी रंगा हमेशा-हमेशा के लिए ब्रह्मलीन हो गए। पीछे छोड़ गए असिम यादें, उनके भजनों के स्वर हर समय उनके चाहने वाले संगीत रसिकों के कानाें में गूंजते रहेंगे। उनकी आवाज में ऐसे मीठास था कि जहां पर वे भजन सुना रहे होते, तो समीप से गुजरने वाला शख्स भी एक बारगी ठहर सा जाता।

विरासत में मिली थी गायिकी…

कैलाश जी रंगा को भजन गायिकी विरासत में मिली थी। उनके पिता पंड़ित मोतीलाल जी रंगा ख्यातिनाम शास्त्रीय गायक थे। मोतीलाल जी ने जो भजन बनाए, वो आज कालजयी रचनाओं में शुमार है। उन्हीं भजनों को सरल भाषा और स्वरों में पिरोकर आमजन तक पहुंचाने में कैलाश जी रंगा ने कोई कसर नहीं छोड़ी।

सावन में महादेव को सुनाते थे…

सावन माह अभी चल रहा है, तो इस बात का उल्लेख जरूरी है कि कैलाश जी रंगा हर साल सावन माह में जनेश्वर मंदिर में नियमित रूप से भगवान शंकर का भजनों से अभिषेक  करते थे। ना केवल सावन, बल्कि भादव माह हो या कृष्ण जन्माष्टमी कैलाश जी की मधुर आवाज संगीत रसिको को सुनने को मिल ही जाती थी।

स्मृतियां जो हमेशा जहन में रहेगी…

कैलाश जी रंगा के साथ जितना भी समय में बिताया है, वो स्मृतियां सदैव अक्षुण रहेगी। फिर बात जन्माष्टमी पर कीर्तन करने की हो, द्वारिकाधीश मंदिर में भजन सत्संग करने की हो, या कहीं सार्वजनिक कार्यक्रम में प्रस्तुति की हो। कैलाश जी का होना ही भजन की महफिल को चार चांद लग जाते थे।

पूरा घराना है संगीत को समर्पित…

हलांकि पंड़ित मोतीलाल रंगा का पूरा परिवार ही एक तरह से संगीत को ही समर्पित है। कैलाश जी की गायिकी की अपनी अलग पहचान थी। वे अपने पिताजी द्वारा रचित और स्वरबद्ध भजनों को पूरी तन्मयता से सच्चे साधक की तरह की गाते थे। इसमें मुख्य रूप से कैलाश जी जिसको स्वयं भी खास पसंद करते थे, इनमें कबीरा बिगड़ गयो राम…अर्जुन से कहते है…करता हूं तेरी बंदगी, तेरे समर्पण जिन्दगी…सरीखे अनगिनत भजन है, जिनको संगीत प्रेमी कैलाश जी की आवाज में सुनना पसंद करते थे।

“निडर इंडिया परिवार की तरफ से ऐसे मृदुभाषी व्यक्तित्व, सुरीले गायक और एक बेहतरीन इंसान श्री कैलाश रंगा को दिल की गहराइयों से श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं। “

रमेश बिस्सा, सम्पादक, निडर इंडिया न्यूज।

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