बीकानेर, निडर इंडिया न्यूज।




भीषण गर्मी में नहरबंदी से उपजे पेयजल सकंट के बाद अब लोगों के सब्र का बांध टूट रहा है। लोग पानी की मांग को लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं, टंकियों पर चढ़कर अपना विरोध जता रहे हैं। सुजानदेसर, खुदखुदा डेरा, सलागनाथ जी का डेरा एवं आसपास के क्षेत्रों में कई दिनों से पेयजल संकट गहरा गया है। इसके चलते आमजन का आक्रोश अब खुलकर सामने आया। क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों के दौरान ठेकेदार की लापरवाही से मुख्य पेयजल पाइपलाइन तोड़े जाने के कारण बड़ी आबादी पानी की किल्लत झेल रही है। समस्या से त्रस्त नागरिकों ने जलदाय विभाग (PHED) के जेईएनअजय कुमार चौधरी का घेराव कर तत्काल समाधान की मांग उठाई।
इससे पूर्व क्षेत्रवासियों और प्रबुद्धजनों की एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें भाजपा शहर जिला महामंत्री एवं पूर्व उपमहापौर राजेंद्र पंवार और गोपेश्वर मंडल अध्यक्ष प्रेम गहलोत ने प्रशासन और संबंधित ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर आक्रोश जताया। उन्होंने कहा कि बिना किसी पूर्व सूचना और वैकल्पिक व्यवस्था के मुख्य पाइपलाइन को काट देना जनता के मूल अधिकारों के साथ अन्याय है। लोग निजी टैंकरों पर अतिरिक्त खर्च उठाने को मजबूर हैं।
किसान मोर्चा जिला मंत्री नेमीचंद गहलोत ने चेतावनी देते हुए कहा कि विकास कार्यों के नाम पर उपजे इस संकट ने लोगों को झकझोर दिया है। पाइपलाइन कटने के कई दिनों बाद भी मरम्मत कार्य पूरा नहीं होना विभागीय लापरवाही का नमूना है।
क्षेत्रवासियों के अनुसार इसकी जानकारी मिलने पर विधायक जेठानन्द व्यास ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए जलदाय विभाग के अधिकारियों को तत्काल समाधान के निर्देश दिए।
प्रतिनिधिमंडल ने सौंपा ज्ञापन…
सुजानदेसर एवं खुदखुदा डेरा क्षेत्र की कटी हुई मुख्य पाइपलाइन को तुरंत जोड़ा जाए और नियमित जलापूर्ति बहाल की जाए। जब तक पाइपलाइन पूरी तरह दुरुस्त नहीं होती, तब तक प्रभावित क्षेत्रों में निशुल्क पानी के टैंकर भेजे जाएं,लापरवाही बरतने वाले संबंधित ठेकेदार, लाइनमैन और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। इसके बाद जेईएन अजय कुमार चौधरी ने समस्या को गंभीर बताते हुए आश्वासन दिया कि विभाग जल्द से जल्द पाइपलाइन की मरम्मत कर क्षेत्र में सुचारू जलापूर्ति बहाल करेगा।
इस दौरान मुकेश बन, गोपीकिशन गहलोत, दीपक गहलोत, शिव गहलोत, पवन सांखला सहित क्षेत्र के सैकड़ों वार्डवासी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में मातृशक्ति भी शामिल हुई।






