बीकानेर : पंचतत्व में विलीन हुए फन्ना बाबू , पुत्र दीपक अग्रवाल ने दी मुखाग्नि - Nidar India

बीकानेर : पंचतत्व में विलीन हुए फन्ना बाबू , पुत्र दीपक अग्रवाल ने दी मुखाग्नि

-अंतिम यात्रा में शामिल हुए अशोक गहलोत, व्यापार जगत में छाया शोक

बीकानेर, निडर इंडिया न्यूज। 

देश और दुनिया में बीकानेर को नई पहचान दिलाने वाले बीकाजी फूड्स के सीएमडी शिवरतन अग्रवाल ‘फन्ना बाबू का शुक्रवार को अंतिम संस्कार किया गया। उनकी पार्थिव देह पंचतत्व में विलीन हुई। हाड़ी कुंडी स्थित उनके पैतृक श्मशान घाट में पूरे विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। इस दौरान प्रदेशभर से आए गणमान्य व्यक्तियों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, जनप्रतिनिधियों और शहरवासियों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। इस दौरान शहर के प्रमुख व्यापारी, उद्योगपति, समाजसेवी और आमजन भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

शुक्रवार सुबह उनके निवास पर अंतिम दर्शन के लिए लोगों का तांता लगा रहा। बड़ी संख्या में लोगों ने पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की और परिवारजनों को सांत्वना दी। इसके बाद उनकी अंतिम यात्रा उनके निवास स्थान से शुरू होकर शहर के विभिन्न मार्गों से होती हुई नत्थूसर गेट के बाहर स्थित हाड़ी कुंडी (श्मशान स्थल) पहुंची। अंतिम यात्रा में शहर के हर वर्ग के लोग शामिल हुए, जो उनके प्रति सम्मान और स्नेह का प्रतीक था।

श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व मंत्री देवी सिंह भाटी, पूर्व मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला, गोविंद मेघवाल शामिल हुए। साथ ही भंवर सिंह भाटी, पूर्व विधायक मंगलाराम गोदारा, कांग्रेस अध्यक्ष मदन गोपाल मेवाल, यशपाल गहलोत सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। इसके अलावा बीकानेर जिला उद्योग संघ के अध्यक्ष द्वारकाप्रसाद पचसिया, कन्हैयालाल बोधरा नगर विकास न्यास के पूर्व अध्यक्ष महावीर रांका अशोक सुराणा, जयकिशन अग्रवाल, राजीव शर्मा, वरिष्ठ साहित्यकार राजेंद्र जोशी वरिष्ठ अधिवक्ता हाल हर्ष सहित अनेक लोग मौजूद रहे।

केन्द्रीय कानून मंत्री की ओर से उनके निजी सहायक विक्रम सिंह राजपुरोहित ने पुष्प चक्र अर्पित किया। फन्ना बाबू ने अपने नेतृत्व में बीकाजी को देश-विदेश में एक अलग पहचान दिलाई। उनके निधन को उद्योग जगत और बीकानेर के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उनकी सादगी दूरदर्शिता और सामाजिक सरोकारों के प्रति समर्पण को सभी ने याद किया। अंतिम संस्कार के दौरान वातावरण शोकाकुल रहा और हर किसी की जुबान पर फन्ना बाबू के व्यक्तित्व और योगदान की चर्चा रही।

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