बीकानेर, निडर इंडिया न्यूज।

धुलंड़ी के साथ ही शहर में बालि गणगौर पूजन शुरू हो गया है। परम्परा के अनुसार होलिका की राख से पिड़ोलियां बनाकर उससे गणगौर माता का पूजन बालिकाओं ने घर-घर में शुरू किया। अब यह पूजन एक पखावाड़े तक चलेगा। बालि गणगौर की विदाई के दिन से ही विवाहित महिलाएं धींगा गणौर का पूजन शुरू करेंगी।

कलकते हालो गवरियों री मौजा बीकानेर में…
“कलकते हालो गवरियो री मौजा बीकानेर में…गढ़ा हे कोटां सूं हे गवरल ऊतरी होजी वै रे हाथ कमल केरो फूल है…गवरल रूड़ो नजारो तीखो नैणां रो…गणगौर माता का बखाने करते गीत एक बार फिर से गूंजने लग है।

परम्परा के अनुसार धुलंड़ी के दिन सुबह जब बालिकाएं गणगौर का पूजन शुरू कर देती है। तो इसी रात को शहर में पुरुष मंड़लियां विधविधान से गणगौर गीतों का गायन शुरू कर देते हैं। परम्परा के अनुसार बारहगुवाड़ चौक में फूफड़ों के पाटे के पास गणगौर गीतों का आगाज किया गया।
बारहगुवाड़ में फूफड़ों के पाटे समीप पंड़ित जुगलकिशोर ओझा(पुजारी बाबा) के सान्निध्य में पुरुष मंड़ली ने गणगौर गीतों का आगाज किया। अब यह सिलसिला आगामी एक माह तक शहर में चलेगा। आस्थावान लोग घर-घर जाकर गणगौर गीतों की प्रस्तुतियां देंगे। यह परम्परा बीकानेर में शहर की अनुठी है। बारहगुवाड़ के साथ ही सूरदासाणी गली में भी कल से ही पुरुष मंड़ली ने गणगौर गीत शुरू की है।






