कला जगत : बीकानेर की डॉ.आभा शंकर का सुयश, राष्ट्रीय स्तर पर मिला "विजनरी इंडियन अवार्ड" - Nidar India

कला जगत : बीकानेर की डॉ.आभा शंकर का सुयश, राष्ट्रीय स्तर पर मिला “विजनरी इंडियन अवार्ड”

बीकानेर, निडर इंडिया न्यूज। 

बीकानेर और प्रदेश की सुप्रसिद्ध अभिनेत्री, निर्देशक ,संगीतज्ञ,पर्सनैलिटी डेवलपमेंट थैरेपिस्ट डॉ.आभा शंकर को उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए दिल्ली में “गोल्डन स्पैरो” संस्था की ओर से “विजनरी इंडियन अवार्ड” प्रदान किया गया है।

यह पुरस्कार समारोह आकाशवाणी भवन, प्रसार भारती नई दिल्ली में आयोजित किया गया। इस समारोह में देश के अलग-अलग क्षेत्रों इसमें कला,विज्ञान, साहित्य व अन्य रचनात्मक उत्कृष्ट कार्य करने वाले चुनिंदा लोगों को प्रदान किया गया । डॉ.आभा शंकर को यह पुरस्कार सिने जगत की सुप्रसिद्ध अभिनेत्री पूनम ढिल्लों ने प्रदान किया।

नाटक के क्षेत्र में डॉ. आभा शंकर का उल्लेखनीय योगदान रहा है। इस संबंध में नाटक “टूटते बंधन” के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। डॉ.आभा शंकर को कई बार बेस्ट प्ले, बेस्ट एक्ट्रेस, बेस्ट डायरेक्टर, बेस्ट क्लासिकल सिंगर, बेस्ट सुगम संगीत सिंगर के रूप में भी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया।

डॉ.आभा शंकर ने कला क्षेत्र के अलावा पर्सनैलिटी डेवलपमेंट क्षेत्र में दिवंगत डॉ. वी एन .पाठक से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद पर्सनैलिटी डेवलपमेंट थैरेपिस्ट/ साइकोलॉजिकल हीलर के रूप में भी विगत 30 वर्षों से लगभग 1000 से अधिक लोगो का निशुल्क ट्रीटमेंट किया है ।आप कैथार्सिस एवं काउंसलिंग विशेषज्ञ है । आप लोगों की हीलिंग “ईगोग्राम” व “जर्मन थैरेपीज” के माध्यम से करती है

डॉ.आभा शंकर की इस उपलब्धि पर बीकानेर के रंगधर्मियों ने प्रसन्नता व्यक्त की गई है। इसमें लक्ष्मीनारायण सोनी, प्रदीप भटनागर, सुरेश हिंदुस्तानी, दयानंद शर्मा,विपिन पुरोहित, संगीता शर्मा, मंदाकिनी जोशी, मंजू रांकावत ,रमेश शर्मा रमेश बोहरा, रमेश जोशी, अशोक जोशी , भरत सिंह राजपुरोहित,दिलीप सिंह भाटी, उत्तम सिंह,कान नाथ गोदारा, सुदेश व्यास, सुदेश व्यास सुनील जोशी शिव सुथार गौरव सोनी जितेंद्र पुरोहित के के रंगा ,विकास शर्मा ,सुरेंद्र स्वामी, सुरेश खत्री, सुनील जोशी , सुरेश आचार्य , अभिषेक आचार्य,नवल व्यास, आमिर हुसैन, राहुल चावला,अशोक व्यास , मीनू गौड, प्रियंका आर्य ,पूनम चौधरी आदि ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए डॉ. आभा शंकर को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होने पर बीकानेर रंग जगत की बड़ी उपलब्धि बताया।

गौरतलब है कि डॉ. आभा शंकर का बचपन में संगीत के प्रति बहुत गहरा लगाव रहा है,आप पांचवी कक्षा से ही मंच पर तबले की संगत करने लगी थी। इसके बाद डॉ. आभा शंकर ने “तबला” विषय लेकर “मेरठ यूनिवर्सिटी” से एम. ए.किया साथ ही गायन व नृत्य के भी मंच प्रदर्शन करने लगी। बाद में इन्होंने रुहेलखंड यूनिवर्सिटी से गायन में भी एम.ए. किया ! संगीत के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शनों एवं योग्यता के लिए इन्हें भारतीय रेल में स्थाई रूप से सेवा के लिए 1984 में चयनित किया गया! यह बीकानेर का सौभाग्य रहा कि उनको भारतीय रेल में भी बीकानेर राजस्थान में नियुक्ति मिली आपने रेलवे ने लंबे समय तक सांस्कृतिक सचिव का पद,कार्य बखूबी संभाला आप वर्ष 2019 में सहा.वित्त सलाहकार के पद से उत्तर पश्चिम रेलवे बीकानेर से सेवानिवृत हुई।


निष्ठा के साथ कर्म करने का संकल्प : “निडर इंडिया” ने पूरा किया तीन साल का सफर, चुनौतियां का किया डटकर सामना, मिला पाठकों का सहयोग

 

रमेश बिस्सा

बीकानेर, निडर इंडिया न्यूज। 

प्रिय पाठकों को आपको यह जानकर परम हर्ष  होगा कि आज आपके अपने न्यूज पोर्टल निडर इंडिया “ ने अपना तीन साल का सफर पूरा कर लिया है और चौथे साल में प्रवेश कर रहा है। विगत तीन साल का सफर निडर इंडिया के लिए आसान नहीं था, कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा, यहां तक पहुंचने में कई बाधाएं भी आई, तकनीकी रूप से परेशानियां भी हुई, इन सबके बावजूद सुखद यह है कि आज निडर इंडिया ने अपने दृढ़ संकल्प और पूरी निष्ठा के साथ तीन साल का सफर सफलता से पूरा कर लिया है। इस पायदान तक पहुंचाने में आप पाठकों की ही बड़ी अहम भागीदारी रही है। आपका स्नेह और प्रेम ही है कि आज के प्रतिस्पर्धा भरे इस युग में निडर इंडिया अपने नाम को साकार करता हुआ आगे बढ़ता जा रहा है। चौथे साल में प्रवेश कराने के लिए पाठकों का हदृय की गहराइयों से आभार। उम्मीद करता हूं आपका स्नेह यूं ही आगे भी बना रहेगा। 

बदल रही है पत्रकारिता

आज पत्रकारिता के मायने, उसका स्वरूप ही बदल रहा है। यह सही है कि साइबर युग है, डिजिटल का जमना है, ऐसे में मीडिया थोड़ा बदलाव करना तो जरूर है। लेकिन बीते दशकों में पत्रकारिता में कई तरह के बदलाव सामने आए है। मैने अपनी पत्रकारिता का सफर दैनिक लोकमत 1996 में शुरू कर दिया था, वह दौर प्रिंट मीडिया का था। तो उसमें काम करने का अपना एक अनुठा अनुभव था। उस समय एक मिशन के रूप में पत्रकारिता की बारिकियां सिखने का एक जुनून था, मन में उत्साह भी था। उस समय के अखबारों में जो काम किया, वो एक नौकरी की तरह नहीं होकर एक पाठशाला की तरह हुआ करता था। आज सबकुछ बदल सा गया है। पहले जहां पत्रकारिता की नींव रखने के लिए अखबारों में जाकर अुनभव लेना पड़ता था, आज हाई टेक जमाना है, आज सोशल मीडिया के कई तरह के प्लेटफार्म सामने है, जिनके जरिए कोई भी इस क्षेत्र में आज सकता है। हो भी यही रहा है आज मोबाइल पर वीडियाे बनाकर सीधे ही पत्रकार बन रहे हैं, हलांकि युवाओं का पत्रकारिता के प्रति लगाव होना अच्छे संकेत है, फिर भी पत्रकार बनने के लिए जो  नींव है, वहां तक तो जाना ही चाहिए। मैंने वर्ष 2020 तक लगातार प्रिंट मीडिया में  काम करते हुए पत्रकारिता की बारिकियां और उसकी गंभीरता को समझा और परखा है। इसके बाद ही न्यूज पोर्टल की कल्पना को साकार रूप दिया था।  

कइयों से मिला मार्गदर्शन…

निडर इंडिया के तीन साल के सफर में कई वरिष्ठ साथियों का सानिध्य मिला है। तो कई युवा साथियों ने नई तकनीकी की बारिकियां सिखाने में हमेशा ही सहयोग किया है। आशा करता हूं आगे भी साथियों का सहयोग मिलता रहेगा। उसी ताकत के बल पर निडर इंडिया यूं ही पत्रकारिता के चुनौतियों को स्वीकार कर इस कठिन डगर पर आगे बढ़ता रहेगा। इसी आशा-उम्मीद और संकल्प के साथ एक बार फिर से सभी पाठकों, सहयोगियों और पत्रकार साथियों का दिल से आभार। 

म्पादक, निडर इंडिया न्यूज। 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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