शनि मंदिरों में चलेगा पूजा-अर्चना और तेलाभिषेक का सिलसिला




बीकानेर, निडर इंडिया न्यूज।
ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या के अवसर पर शनिवार को वट सावित्री व्रत और शनि जयंती का पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्य पंडित राजेंद्र करने ने बताया कि इस बार शनि जयंती शनिवार के दिन पड़ने से इसका महत्व और अधिक बढ़ गया है।
उन्होंने बताया कि वट सावित्री व्रत में सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु और सुखमय वैवाहिक जीवन की कामना के लिए व्रत रखकर वट वृक्ष तथा माता सावित्री की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करती हैं। सनातन धर्म में वट वृक्ष को ब्रह्मा, विष्णु और महेश का स्वरूप माना गया है, इसलिए इस दिन वट वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।
पंडित किराड़ू के बताया कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिन लोगों की कुंडली में शनि की अशुभ दशा, साढ़ेसाती या ढैया चल रही हो, उन्हें शनि जयंती पर शनिदेव का विशेष पूजन, अभिषेक और शनि चालीसा का पाठ करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस दिन काला वस्त्र, तिल, तेल, लोहे के पात्र सहित शनि ग्रह से संबंधित वस्तुओं का दान करना शुभ और फलदायी माना गया है।
उन्होंने बताया कि पद्म पुराण सहित विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में ज्येष्ठ अमावस्या का विशेष महत्व बताया गया है। इस बार वट सावित्री व्रत और शनि जयंती का एक साथ पड़ना श्रद्धालुओं के लिए विशेष पुण्यदायी संयोग माना जा रहा है।
शनि शिंगणापुर धाम में विशेष आयोजन

शनि जयंती पर दुर्गा कॉलोनी, उदासर स्थित शनि शिंगणापुर धाम में विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। इस दौरान सुबह 7 बजे से पंचामृत स्नान व तेल अभिषेक व 7.30 महा आरती व छप्पन भोग सुबह 9 बजे से नौ कुण्डी यज्ञ में 27 जोड़ी द्वारा यज्ञ किया जाएगा। यज्ञ के बाद दाता रामेश्वरानंद महाराज का प्रवचन होगा। वहीं 12.30 विशाल भंडारा आयोजित किया जाएगा। रात 9 बजे से माता कि खाजुवाला मण्डली की ओर से भजनों की प्रस्तुतियां दी जाएगी।






