बीकानेर : सड़ांध मार रहा है शहर, जिम्मेवार कौन?

गली मोहल्लों से लेकर कॉलोनियों तक लगे है कचरे के ढेर

बीकानेर, निडर इंडिया न्यूज। 

बीकानेर में नगर निगम का नया बोर्ड भी गठित हो गया। पहली बैठक भी हो गई। शहर को स्वच्छ रखने की बात तो उठती रही है, लेकिन अब तक पूरे शहर के हालात बद से बदतर है। दीपावली का त्योहार आने को है। शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह से लचर है। गली-मोहल्लों से लेकर कॉलोनियों तक कचरे के ढेर लगे है, तो नाले-नालियां उफान मार रहे हैं। भले ही इसके लिए कोई भी जिम्मेवार हो, मगर आमजन को इससे क्या? उनको सफाई से मतलब है, जिस जनता ने हाल ही में हुए चुनावों में अपने-अपने क्षेत्रों से पार्षद चुनकर भेजे हैं, क्या अब उनकी कोई जिम्मेवारी नहीं है, कि वो अपने क्षेत्र में नियमित रूप से सफाई व्यवस्था सुचारु बनाने के लिए पहल करें।

भीतरी परकोटे के एक मोहल्ले में लगा कचरे का ढेर।

क्या निगम प्रशासन कुंभकरणी नींद में है? 

शहर को साफ-सुथरा रखने के लिए एक पूरा विभाग है, लेकिन उनके एसी कमरों में बैठे आला अफसरों को शहर के लिए कोई दर्द नहीं है? क्यों वो भी जन सेवक ही है, फिर बेरुखी क्यों? कचरा उठाने के लिए क्या व्यवस्था कर रखी है, उससे जनता के लिए कोई मायने नहीं रखता। आमजन को सफाई व्यवस्था माकूल चाहिए, उसके लिए निगम प्रशासन को ठोस कदम उठाने की दरकार है। त्योहार तो अब समीप ही आ गया है। दूसरी ओर शहर की बदहाल तस्वीर है, जो आम आदमी के लिए परेशानी का सबब बन गई है। आमजन अपने को ठगा सा महसूस करने लगी है। हलांकि कई पार्षद इस मुद्दे को लेकर निगम प्रशासन को घेर चुके हैं, इसके बावजूद आला अफसरों के कान पर जू तक नहीं रेंग रही है।

मुरलीधर में कचरे से अटे नाले

शहर के साथ ही मुरलीधर व्यास कॉलोनी में भी सफाई चौपट है। मौसम विभाग रोड पर नाले लंबे समय से बंद पड़े हैं। यह क्षतिग्रस्त पड़े है, जिसके कारण नालों का गंदा पानी सड़क पर फैल जाता है। यहां पर झाड़ियां उग आई है, इस कारण चारों तरफ मच्छरों का आतंक है। घरों से बाहर बैठने वाले लोगों के लिए तो श्वास लेना भी दुभर हो गया है। मोहल्लेवासियों ने रोष जताते हुए कहा कि कई बार इस संबंध में निगम प्रशासन और बीडीए प्रशासन को भी अवगत कराया, लेकिन स्थित जस की तस पड़ी है।

क्या कहते है जागरुक नागरिक…

मुरलीधर विकास समिति के अध्यक्ष कमल नारायण व्यास और सचिव पुरुषोत्तम रंगा ने रोष जताते हुए बताया कि शाम के समय महिलाएं घरों के आगे सत्संग करती है, लेकिन गंदगी का आलम यह है कि यहां खड़ा रहना भी दुभर होता है। समीप ही पुस्तकालय है, जहां पर छात्राएं पढ़ने के लिए आती है, दूषित वातावरण के कारण बैठना दुभर हो जाता है। समिति के पदाधिकारियों ने जल्द ही इस समस्या का समाधान कराने की चेतावनी दी है, साथ ही संबंधित को जिम्मेवारी देने की मांग उठाई है।

 

 

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