
पुष्टिमार्गी मदन मोहन मंदिर में बही सुरों की सरिता, कलाकारों ने अष्टछाप कवियों के पदों से बांधा समां

बीकानेर, निडर इंडिया न्यूज।
हवेली संगीत केवल गायन की एक विधा नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध भक्ति और सांस्कृतिक परंपरा की जीवंत धरोहर है। यह कहना है सिंपलेक्स इंफ्रा के एमिरेट्स अध्यक्ष विट्ठल दास मूंधड़ा का। यह बात आज उन्होंने नत्थूसर गेट बाहर स्थित मूंधड़ा बागेची परिसर के पुष्टिमार्गी श्री मदन मोहन मंदिर प्रांगण में कही। अवसर था संगीत संध्या का। जहां पर कलाकारों ने हवेली संगीत की समृद्ध परंपरा को सुरों में पिरोया। हवेली संगीत को समर्पित श्री मदन मोहन संगीतालय का वार्षिक उत्सव श्रद्धा, उल्लास के साथ मनाया गया। कलाकरों ने अष्टछाप कवियों के पदों को स्वरबद्ध किया, तो माहौल में भक्ति रस की मिठास घुल गई।
समारोह में संगीतालय के 7 से 25 वर्ष आयु वर्ग के विद्यार्थियों ने अष्टछाप कवियों द्वारा रचित भजनों एवं पदों को हवेली संगीत की पारंपरिक शैली में प्रस्तुत किया। बाल एवं युवा कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।
इस अवसर पर सिंपलेक्स इंफ्रा के एमिरेट्स अध्यक्ष श्री विट्ठल दास मूंधड़ा ने हवेली संगीत की महत्ता और अष्टछाप कवियों के पदों एवं हवेली संगीत साधना पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संगीतालय में इसकी शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थी आने वाले समय में हवेली संगीत को देशभर में नए सिरे से प्रतिष्ठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने सभी विद्यार्थियों को आशीर्वाद देते हुए उनकी संगीत साधना की सराहना की।
कार्यक्रम में यात्विक श्रीमाली, माधव श्रीमाली, आकांक्षा व्यास, अंजलि प्रजापत, चंचल किराडू, पूर्वी ओझा, रामकुमार पारीक, राघव स्वामी, योगेश पुरोहित, धनाक्षी तिवारी एवं युवी जोशी ने संगीत गुरु नारायण दास रंगा के निर्देशन में एक से बढ़कर एक सुमधुर भजनों की प्रस्तुति दी।
संगत में मृदंग पर धीरज पुरोहित और झांझ पर भागीरथ कच्छावा ने अपनी कला से प्रस्तुतियों को और अधिक प्रभावशाली बना दिया। कार्यक्रम का संचालन दामोदर तंवर ने किया।







