बीकानेर, निडर इंडिया न्यूज। 

“माता ऐ म्हारे टाबरियों रे ठंड़ रा झाला दे वो ऐ…शीतला माता से बच्चों की निरोगी काया के लिए अरदास की। माता को ठंड़े पकवान, पानी और नमक अर्पित किया। अवसर था शीतला अष्टमी पर्व का। परम्परा के अनुसार घरों में आज नई मटकी पानी से भरकर उस पर गर्दभ (गधे) की आकृति उकेर कर मटकी का पूजन किया गया। वहीं शीतला माता मंदिरों में पानी, नमक और ठंड़ा(बासी) पकवानों का मां के भोग लगाया गया।

इसके लिए  एक दिन पहले बनाए गए ठंडे (बासी) भोजन का भोग लगाकर माता शीतला की पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि मांगी, साथ ही रोगों से रक्षा की कामना की गई। महिलाओं ने घरों में कई तरह की पूड़ियां और सांगरी सहित कई तरह की सब्जियां बनाई, दही राब, गुड़ राब बनाई गई। आज इस सामाग्री को पहले मां को अर्पित किया गया। फिर उसका सेवन किया गया। शीतला अष्टमी को लेकर मंदिरों के बाहर मेेले भरे। मंदिरों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं।

शीतला गेट स्थित प्राचीन मंदिर, मरुनायक चौक और जनेश्वर मंदिर परिसर, सूरसागर के समीप में मंदिर सहित शीतला माता के मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। भक्तों ने श्रद्धा के साथ माता के दर्शन कर प्रसाद अर्पित किया।

शहर के कई स्थानों पर सामूहिक पूजा और कथा का आयोजन भी हुआ। मान्यता है कि शीतला माता की पूजा से चेचक सहित विभिन्न रोगों से रक्षा होती है और घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

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