बीकानेर, निडर इंडिया न्यूज।

“माता ए म्हारे टाबरियों ने ठंड़ रा झाला दे वो रे…दिन भर होली के रंगों की मस्ती में डूबे शहरवासियों ने शाम को अपनी कुलदेवी से सुख-शांति, शुभ मंगल की कमना की। यह नजारा शाम गहराने के साथ ही मंगलवार को अलग-अलग मोहल्लों में नजर आया। धुलंड़ी के अवसर पर दिनभर रंगों की होली खेलने के बाद अंत में शाम को कुशल मंगल होली का पर्व मनाए जाने के बाद देवी माता से अरदास की। अन्य महानगरों की तरह बीकानेर में भी कुछ क्षेत्रों में आज धुलंड़ी मनाई गई।
आसमान में छाया रंग का गुब्बार

धुलंड़ी के दिन सुबह से ही रंगों में रंगा नजर आया शहर। हर गली-मोहल्लें में एक-दूसरे के शरीर पर होलिका दहन की राख मलते नजर आए। इसके बाद शुरू हुआ रंग-गुलाल लगाने का सिलसिला जो शाम तक चला। इस दौरान दिनभर हर कोई होली की मस्ती में डूबा रहा। खाने-पीने का दौर भी दिनभर चल रहा।
नवविवाहित युवाओं को ससूराल में बुलाकर रंग का छापा लगाने की रस्म भी निभाई वहीं अलग-अलग मोहल्लों से होली की पारम्परिक गेर भी निकली। शहरी क्षेत्र में धुलंड़ी की सुबह और शाम बीकानेर पुजारी बाबा की प्रसिद्ध गेर निकाली तो माहौल में पूरी तरह से होली की रंगत छा गई।
हर्ष जाति के दूल्हे की बरात निकली…
होली की परम्परा में शामिल हर्ष जाति के दूल्हे की बारात निकाली गई। हर्षों के चौक से रवाना हुई बारात मूंधड़ा चौक होते हुए दम्माणी चौक पहुंची। इस बीच रास्ते में कई स्थानों पर बारात का स्वागत सत्कार किया गया। कई घरों में दूल्हे को पोखन की परम्परा भी निभाई गई। महिलाओं ने मांगलिक गीत भी गाए।
नत्थूसर गेट पर छाया रंग का गुब्बार…
धुलंड़ी के दिन नत्थूसर गेट के बाहर तणी तोड़ने की परम्परा का निर्वाह किया गया। जोशी जाति का युवक तणी को तोड़ते हैं। इसको देखने के लिए सैकड़ों की तादाद में पूरा शहर ही उमड़ पड़ा। हर किसी ने गुलाल उड़ाई, तो आसमान में गुलाल की एक गुब्बार छा गया। पूरे क्षेत्र में हर ओर रंग-गुलाल से सराबोर हो गया।
बाहरगुवाड़ में डोलची मार खेल…
होली के दिन बारहगुवाड़ में सतरंगी डोलची मार खेल का आयोजन किया गया। दोपहर को शुरू हुआ डोलची मार ओझा और छंगाणी जाति लोगों के बीच खेला गया। इस दौरान एक दूसरे पर डोलची भर-भर के पानी और रंग डाला गया। इसको लेकर बारहगुवाड़ चौक में सैकड़ों की भीड़ रही।

वहीं होली के दिन मंगलवार को शाम को गोधुली वेला के साथ ही कई मोहल्लों में मध्य रात्रि के बाद भी होली का दहन किया गया। इस दौरान भक्त प्रहलाद के जयकार गूंज उठे। नवविवाहितों ने ढूढणा की रस्म निभाई। पारम्परिक गीत गाए गए। इसके बाद साधकों ने होलिका के समीप बैठक मंत्र जाप किया।

बारहगुवाड़ में अंतिम रम्मत हेडाऊ मेहरी का मंचन किया गया। सोमवार देर रात शुरू हुई रम्मत मंगलवार सुबह करीब 11 बजे तक रम्मत चली।
आज रामा-शामा में बीता दिन…
बीकानेर शहर में कल धुलंड़ी मनाई गई। वहीं आज जौम बीज मनाई गई। सुबह घरों में चावल-दाल, खीचड़ी बनाई गई। बहिनों ने अपने भाइयों की नजर उतारी। वहीं दिनभर आज रामा-शामा का सिलसिला जारी रहा।
फोटो : एसएन जोशी।






