गुरुवार को देर रात तक रही रौनक, गूंजा ‘ओम ना सुसी सा…….’

रत्ताणी व्यासों की बगीची में हुआ सामूहिक यज्ञोपवित संस्कार
पुष्करणा ब्राह्मण समाज के ओलम्पिक सावे से पहले शुक्रवार को शहरी परकोटे के विभिन्न चौक-मोहल्लों में हाथ में पाटी, घोटा और लंगोटी पहने बटुक दौड़ते नजर आए। परम्परा के अनुसार पढ़ने के लिए काशी निकले बटुकों से उनके परिजनों ने समझाइश की। इस दौरान छोटे-छोटे बटुकों ने नहीं मानने की शरारत की भी की, लेकिन अंततः वे घर लौटे और सजधज ‘देरावळी’ के लिए ननिहाल के लिए रवाना हुए।


इससे पहले बटुकों के परिजनों ने ‘तामड़ा पुरसने’ की परम्परा भी निभाई। महिलाओं ने मंगल गीत गाए। बटुकों के दौड़कर आने के बाद ननिहाल से ‘मायरा’ आया। कुल मिलाकर शुक्रवार का मांगालिक कार्यक्रम परवान पर रहे। अनेक घरों में बटुकों की यज्ञोपिवत संस्कार हुए। ‘खोळा भराई’ तथा ‘प्रसाद’ लाने-ले जाने की परम्परा का निर्वहन भी हुआ।

वहीं गुरुवार देररात बटुकों की छींकी निकली तो शहर ‘ओम ना, सुसी सा….’ और ‘केसरियो लाडो’ जैसी टेर से गूंज गया। ‘छींकी’ से पहले घर के दामादों ने ‘घोड़ी’ की पूजा करवाई और ससुराल के परिजनों ने उन्हें शगुन दिया। गुरुवार को भी विवाह वाले अनेक घरों में हाथकाम और गणेश पूजा भी हुई। यह दौरान शुक्रवार को भी जारी रहा।

रत्ताणी व्यासों की बगीची में सर्व ब्राह्मण समाज का सामूहिक यज्ञोपवित समारोह आयोजित
उधर, रत्ताणी व्यासों की बगीची और मां सरस्वती वेदाश्रम सामूहिक यज्ञोपवित संस्कार के आयोजित हुए। रत्ताणी व्यासों की बगीची में 41 और मां सरस्वती वेदाश्रम में 21 बटुकों के सामूहिक यज्ञोपित कार्यक्रम आयोजित किए गए। इससे पूर्व प्रायश्चित कर्म कराया गया था। सामूहिक यज्ञोपित संस्कार के प्रति भी आमजन में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।
आयोजन सचिव पंडित प्रहलाद व्यास और डॉ. मदन मोहन पुरोहित (पुराणोपासक) के सान्निध्य में विधिपूर्वक यज्ञोपवीत संस्कार कराया गया। इस अवसर पर समाज के अनेक गणमान्यजन एवं विप्र बंधु उपस्थित रहे। आयोजन का सफल संचालन भैरव साधक समिति, बीकानेर की ओर से किया गया।
धरणीधर में शुरू हुआ राशन वितरण
टीम धरणीधर की ओर से कन्याओं के विवाह को लेकर शुक्रवार से राशन किट का वितरण शुरू किया गया। यह कार्यक्रम शनिवार को भी जारी रहेगा।





