ऋषिकेश : भागवत कथा श्रवण से खुलता है मोक्ष का द्वार : व्यास - Nidar India

ऋषिकेश : भागवत कथा श्रवण से खुलता है मोक्ष का द्वार : व्यास

गुडा के चांड़क परिवार का धार्मिक आयोजन, ऋषिकेश के रतापाणी स्थित फूलचट्‌टी रिसोर्ट में बह रही है भक्ति की धारा, सूरत, अहमदाबाद, मुम्बई,  बैंगलुरु , कोलकता से पहुंचे है श्रद्धालु

रमेश बिस्सा

ऋषिकेश, निडर इंडिया न्यूज

विशालकाय पहाड़। समीप में कलकल बहती नदी की धारा। चारों और घने पेड़ों से छाई हरियाली। ऐसे मनोरम नजारे के बीच में बरसता भक्ति का रस ।  प्रकृति का ऐसा अनुठा नजारा ऋषिकेश से करीब 14 किमी दूर नीलकंठ महादेव रोड पर स्थित रिसोर्ट फूलचट्‌टी में साकार हो रहा है। अवसर है श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह के अनुष्ठान का। इसके माध्यम बने है बीकानेर जिले की कोलायत तहसील के गुड़ा गांव मूल के रहने वाले सूरत और मुम्बई में प्रवास करने वाले चांड़क परिवार।

भक्ति भाव रखने वाले चांड़क  परिवार ने ऐसे दुर्गम स्थान का चयन कर श्रीमद् भागवत कथा आयोजन को असल मायने में साकार कर दिया है। बीकानेर के भागवताचार्य पंड़ित दुर्गादत्त् व्यास के श्रीमुख से चल रही भागवत कथा के तीसरे दिन सोमवार को कई प्रसंगों की व्याख्या हुई। पंड़ित दुर्गादत्त व्यास ने भागवत कथा श्रवण की महत्ता पर प्रकाश डाला।

व्यास ने कहा कि भागवत कथा के सुनने मात्र से मनुष्य को मोक्ष का मार्ग मिलता है। उन्होंने कहा कि भगवान की असीम अनुकंपा होती है, तभी इस तरह के धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन कराया जा सकता है। पंड़ित दुर्गादत्त व्यास ने वर्ण व्याख्यान में वर्ण व्यवस्था और उनके कार्य  बताए। कल कथा में कृष्ण का जन्म होगा। कथा से पूर्व भगवान सालिग्राम सहित कुल देवता, ब्रह्मा सहित देताओं का पूजन पंड़ित अमरचंद पुरोहित ने कराया।

नृसिंह लीला की सजीव झांकी

भागवत कथा के दौरान नृसिंह लीला प्रसंग के दौरान सजीव झांकी निकाली गई। प्रसंग के अनुसार जब भक्त प्रहलाद को उसके पिता हरिणकश्यप सताने लगा, तो साक्षत नारायण खंभ फाड़कर प्रकट हुए, तो पंड़ाल में चोरों और नारायण भगवान के जयकारे गूंज उठे। लीला के में जब हरिणकश्य का वध हुआ, तो सभी ने भक्त प्रहलाद की जय-जय कार की। सजीव झांकी में भक्त प्रहलाद का स्वरूप योनित चांड़क ने धरा। वहीं निकुंज राठी हरिणकश्यप और प्रेक्षा चांड़क ने भगवान नृसिंह का रूप धारण किया। मनमोहक झांकी देखकर पूरा पंड़ाल भक्तिमय हो गया। शाम की महाआरती में सभी श्रद्धालुओं ने भागीदारी निभाई। कथा की पूर्णाहुति 31 अक्टूबर को होगी, अंतिम दिन हवन का अनुष्ठान होगा।

भजनों पर झूमे श्रद्धालु

संगीतमय भागवत कथा में कलाकार राधेश्याम बिस्सा(बिदा महाराज) ने भजनों से कार्यक्रम में समां बांध दिया। बिस्सा ने कृष्ण भजन, भगवान शंकर और खाटूश्याम के भजनों की प्रस्तुति दी तो श्रद्धालु झूम उठे। राधेश्याम के साथ तबला संगत प्रमोद व्यास और ऑर्गन पर दीपांशु आरोड़ा ने संगत की।

 

 

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