एकादशी विशेष दिव्य महायज्ञ में वैदिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से शास्त्रोक्त विधि से दी गई आहुतियां


बीकानेर, निडर इंडिया न्यूज।
गंगाशहर रोड स्थित अग्रवाल भवन में चल रही देवी भागवत और महायज्ञ में रविवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। इस अवसर पर संत विजयानंद गिरि महाराज ने कहा कि व्यक्ति को जन्म से लेकर आज तक क्या-क्या किया ये ध्यान करने की जरुरत है। उन्होंने कहा कि दिल से सभी अपनी गलतियों को याद करो। जाने-अनजाने लोगों को, मां-बाप, पड़ौसियों का दिल दुखाया है तो सब याद करो।

उन्होंने कहा कि संसार में आपका व्यवहार बदल जाएगा तो तकदीर भी बदल जाएगी। वे बोले, शास्त्रों में बताया गया है कि जरुरतमंदों-गरीबों को कपड़ा, अन्नदान करो। उससे किसी का दिल खुश होगा। यदि आपके पास देने को कुछ नहीं है तो गरीब को प्रेम की दृष्टि के साथ देखो और मुस्कुराओ। गले लगो ये भी नि:शुल्क दान है।
आदतें शुभ हाेंगी ताे जीवन भी स्वत: शुभ : जगद्गुरु

वसंत विजयानंद गिरि महाराज ने कहा कि व्यक्ति को सदैव सकारात्मक सोच के साथ सरल भी रहना चाहिए। आदतें शुभ होगी तो जीवन भी स्वत: शुभ होगा। मछलियों को आटे की गोली, पंछियों को दाना देना, विभिन्न जीव राशियों को आहार देना चाहिए। इच्छित अनुसार आहार देना चाहिए। ईश्वर ने किसी जीव को जन्म दिया है तो आहार की व्यवस्था वो ही करेगा।
अपने मार्ग की प्रशस्ति के लिए प्रेम से जीवों को आहार खिलावो। साथ ही हमारे घर में कुलदेवता, इष्टदेवता की पूजा, ईश्वर की आराधना परम्परा से चल रही थी, लेकिन अब नहीं हो रही है। इससे घर-परिवार में संतानहीनता, बीमारी, अशांति उत्पन्न करती है।
तीर्थ धाम के ट्रस्टी डाॅ. संकेश जैन ने बताया कि दोपहर के सत्र में दिवस पर्व के मद्देनजर एकादशी विशेष दिव्य महायज्ञ में वैदिक एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से शास्त्रोक्त विधि पूर्वक काशी के विद्वान विप्र पंडितों द्वारा जगद्गुरु वसंत विजयानंद गिरि जी महाराज की पावन निश्रा में आहुतियां दी गई।
ऐतिहासिक विराट आयोजन में श्रद्धालुओं ने तीसरी बार प्राप्त की गुरु दीक्षा
ग्यारह दिनों के ऐतिहासिक विराट आयोजन में तीसरी बार बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं के आग्रह पर गुरु दीक्षा प्रदान की। पाताल लोक की नागरानी जगत जननी देवी मां पद्मावती, अनंत कोटि ब्रह्मांड नायक देवाधिदेव महादेव, त्रिकाल योगी बाबा भैरवनाथ, रुद्रावतार श्रीहनुमानजी के विभिन्न बीज मंत्रों, रक्षा कवच, स्तोत्र वाचन व सहस्रनाम उच्चारण से दैवीय ऊर्जा के गुणगान किए।
साथ ही साथ देश दुनिया से बड़ी संख्या में मौजूद गुरुभक्त श्रद्धालुओं को सीधे-सीधे सरल शब्दों में यह भी अपना प्रेरणादायक संदेश देते हुए जगद्गुरु ने कहा कि जीवन में आ रही परेशानियों व कठिनाइयों को दूर करने के लिए बुद्धि को ठिकाने लगाओ, अच्छे संतों की शरण में जाकर उनसे आशीर्वाद लो। उन्होंने कहा कि सच्चे विद्वान सिद्ध साधक सरीखे गुरु के चरण में बैठकर पाप को स्वीकार लोगे तो उसी समय पाप का पहाड़ हल्का होगा, जीवन में उन्नति का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा तथा श्राप, दोष व कष्ट निश्चित हल्का होगा।






