बीकानेर, निडर इंडिया न्यूज।



“हे मां तेरी जय हो…तेरे अटलक्षत्र की जय हो…माजी नागाणे री राय…मेरी नित करो सहाय…सरीखे जयकारों से आज देवी मंदिर गूंज उठे। अवसर था चैत्र नवरात्रा के पहले दिन का। नवरात्रा का आगाज गुरुवार को विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ। दोपहर के शुभ मुहूर्त में देवी मंदिरों में घट स्थापना की गई, वहीं घर-घर में भी श्रद्धालुओं ने नवरात्र अनुष्ठान के लिए कलश स्थापित कर पूजा-अर्चना शुरू की।
साथ ही आस्थावान लोगों ने उपवास का संकल्प लिया। नवरात्र के पहले दिन शहर के प्रमुख देवी मंदिरों में विशेष धार्मिक आयोजन किअवए गए। नागणेचेजी मंदिर, नाथूसर गेट के बाहर स्थित मां आशापुरा मंदिर, त्रिपुरा बाला सुंदरी मंदिर, ओसिया माता मंदिर, गायत्री माता मंदिर, सुजानदेसर स्थित काली माता मंदिर, सूरसागर के समीप करणी माता मंदिर, जयपुर रोड स्थित वैष्णो माता मंदिर, अमर सिंहपुरा के वैष्णो माता मंदिर तथा जैसलमेर रोड स्थित देहरू माता मंदिर सहित अन्य देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली।


मंदिरों में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। श्रद्धालुओं ने माता रानी के जयकारों के साथ पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। पुजारियों द्वारा विशेष पूजा-अनुष्ठान, दुर्गा सप्तशती पाठ और आरती का आयोजन किया गया।
वहीं, घरों में भी महिलाओं और परिवारों ने पूरे विधि-विधान से घट स्थापना कर नौ दिनों तक चलने वाले व्रत और पूजा की शुरुआत की। शहर का धार्मिक माहौल भक्तिमय हो गया है और पूरे नौ दिनों तक विभिन्न मंदिरों में विशेष कार्यक्रम, भजन-कीर्तन और जागरण आयोजित किए जाएंगे।
मंदिरों में होगा कन्या पूजन..
नवरात्रा महोत्सव को लेकर मंदिरों में विशेष पूजन अनुष्ठान हुए। नत्थूसर गेट बाहर स्थित त्रिपुरा बाला सुंदरी मंदिर में पंड़ित ग्वालदास व्यास(खुंड़ा महाराज ) के सान्निध्य में माता रानी का विशेष पंचामृत अभिषेक किया गया। पंड़ित रामकुमार व्यास ने बताया कि इसके बाद मां का शृंगार हुआ। आरती के बाद प्रसाद का वितरण किया गया। व्यास के अनुसार मंदिर में अब नौ दिनों तक भक्ति रस की धारा बहेगी।
अंतिम दिन कन्या पूजन होगा। वहीं नत्थूसर गेट बाहर स्थित आशापुरा माता मंदिर में पंड़ित राजकुमार और नृसिंह व्यास के सान्निध्य में पूजन और शृंगार किया गया। मंदिर में शुभ मुर्हूत में घट स्थापित कर नवरात्रा महोत्सव शुरू किया गया। इस दौरान मां आशापुरा का पंचामृत से अभिषेक किया गया। दुर्गाष्टमी पर विशेष पूजन होगा।






