हरीश बी. शर्मा के राजस्थानी से हिन्दी में अनूदित कहानी संग्रह 'बाजोट' का लोकार्पण - Nidar India

हरीश बी. शर्मा के राजस्थानी से हिन्दी में अनूदित कहानी संग्रह ‘बाजोट’ का लोकार्पण

लेखकों ने ‘कहानी का कहन’ परिसंवाद में किया समकालीन कहानी पर विमर्श

बीकानेर, निडर इंडिया न्यूज।

कवि, नाटककार एवं पत्रकार हरीश बी. शर्मा के राजस्थानी से अनूदित कहानी संग्रह ‘बाजोट’ के लोकार्पण शनिवार शाम को जिला उद्योग संघ के सभागार में हुआ। इस अवसर पर अध्यक्ष मधु आचार्य ,मुख्य अतिथि डॉ. रश्मि राय रावत, कहानीकार हरीश बी शर्मा, गायत्री प्रकाशन की गायत्री शर्मा, प्रवीण कुमार शर्मा और मीनाक्षी शर्मा मौजूद रहे।

कहानी के विमर्श कार्यक्रम ‘कहानी का कहन’ पर बोलते हुए पत्रकार, साहित्यकार एवं रंगकर्मी मधु आचार्य ‘आशावादी’ ने कहा कि  ‘कहानी जीवन को संस्कारित करती है। वह समाज के निर्माण में अपनी भूमिका प्रत्यक्ष निभाती है। उसे किसी भी वाद या विमर्श में नहीं बांधा जाना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि हरीश की कहानियां अपने समय को अपने भीतर प्रतिबिम्बित करती हैं। कार्यक्रम में मंच पर संगत प्रदान कर रही, स्विट्जरलैंड के गैलन विश्वविद्यालय की मैण्टोर डॉ. रश्मि राय रावत ने कहा कि हरीश बी. शर्मा की कहानियां समाज के कुछ जरूरी प्रश्नों पर चुप्पी तोड़ने का काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि ये कहानियां उन मुद्दों पर बात करने का आमंत्रण देती हैं, जिनसे हम अक्सर बचने के प्रयास करते हैं।


लोकार्पण के दौरान संग्रह की दस कहानियों के साथ ही ‘कहानी का कहन’ परिसंवाद में राजाराम स्वर्णकार, डॉ. रेणुका व्यास ‘नीलम’, डॉ. गौरीशंकर प्रजापत, इरशाद अज़ीज़, मनीषा आर्य सोनी, विप्लव व्यास, ऋतु शर्मा, रामसहाय हर्ष, व्यास योगेश राजस्थानी एवं आनन्द मस्ताना ने कहानियों के शिल्प, कथ्य और कथा वस्तु के साथ ही वर्तमान जीवन में कथा साहित्य की उपादेयता पर सार्थक संवाद किया।

संयोजक कवि-कथाकार  संजय आचार्य वरुण ने कहा कि कहानी लेखन एक चुनौती होती है, इसमें नहीं कहे जाने लायक बात को, बिना कहे कह देने का हुनर कहानीकार में होना ही चाहिए। हरीश बी. शर्मा अपनी कहानियों में समाज के सत्य को बिना कहे भी सफलता से उद्घाटित करते हैं।
कहानीकार हरीश बी. शर्मा ने अपने लेखकीय वक्तव्य में कहा कि जो दिखता है उसे लिखने के बजाय जो आवरणों में ढका- छुपा है, वह सच सामने आना चाहिए। हमें लेखक होने की अपनी जिम्मेदारियों को न केवल समझना होगा बल्कि उनको ठीक तरह से निभाने के प्रयास भी करने होंगे। उन्होंने कहा कि हम पुस्तक खरीदकर खुश होते हैं लेकिन रचनाकार तब खुश होता है जब आप उस पुस्तक को अपने भीतर उतारते हैं। हमें अच्छे साहित्य के द्वारा पठन-पाठन की संस्कृति को फिर से विकसित करना होगा।

कार्यक्रम के आरम्भ में कहानीकार हरीश बी. शर्मा ने पत्रकार धीरेन्द्र आचार्य को पुस्तक की प्रथम प्रति और स्मृति चिन्ह के रूप में ‘बाजोट’ का लघु प्रतिरूप भेंट किया।  मोटिवेशनल स्पीकर सेतु माथुर ने कहा कि कहानी विधा पर संवाद के साथ हो रहा ये पुस्तक लोकार्पण का कार्यक्रम अपने आप में अनूठा है। संवाद की इस पहल के लिए पारायण फाउण्डेशन और गायत्री प्रकाशन साधुवाद के पात्र हैं।

कार्यक्रम में  कथाकार मालचंद तिवाड़ी, बुलाकी शर्मा, राजेंद्र जोशी, पत्रकार दीपचंद सांखला, रंगकर्मी रवि माथुर, प्रमोद कुमार शर्मा, मोहम्मद फारूक रज़ा, पी. शीतल हर्ष, बाबूलाल छंगाणी, संजय पुरोहित, योगेन्द्र पुरोहित, ऋषिमोहन जोशी, नरेन्द्र व्यास, मोनिका गौड़, सागर सिद्दीकी, कासिम बीकानेरी, रेणु चौहान सोलंकी, विशाल सोलंकी, गिरीराज खैरीवाल, पेन्टर धर्मा, अमित गोस्वामी, महेश उपाध्याय, दयाशंकर शर्मा, मनमोहन शर्मा, अब्दुल शकूर सिसोदिया, मधुसूदन सोनी, प्रणीत सुशील, अब्दुल सत्तार कमल,सौरम शर्मा, जुगल किशोर पुरोहित एवं शिवशंकर व्यास सहित कई साहित्यानुरागी एवं गणमान्य जन उपस्थित रहे। वास्तुविद आर के सुतार ने सभी का आभार जताया।

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