कोलकाता : महानगर में बहेगी भक्ति की सरिता, कल से 21 कुंडात्मक विराट श्री हरिहर हनुमंत महायज्ञ - Nidar India

कोलकाता : महानगर में बहेगी भक्ति की सरिता, कल से 21 कुंडात्मक विराट श्री हरिहर हनुमंत महायज्ञ

लिलुआ के शांति नगर ग्राउंड में होगा धार्मिक अनुष्ठान, 11 जनवरी तक चलेगा

 बीकानेर, कोलकाता, निडर इंडिया न्यूज। 
पंडित गोरखा महाराज ओझा वेद प्रचार संस्थान के तत्वाधान में 4 जनवरी रविवार से 11 जनवरी रविवार 2026 तक आयोजित होने वाले 21 कुंडात्मक विराट श्री हरि हर हनुमंत महायज्ञ की तैयारियों को आज अंतिम रूप दिया गया। लिलुआ के शांति नगर ग्राउंड में होने वाला महायज्ञ 11 जनवरी तक चलेगा। महायज्ञ के प्रधानाचार्य पंडित दाऊ ओझा झालापट्टा यागिक सम्राट के सानिध्य में वेद पाठी विद्वान इसमें भागीदारी निभाएंगे। साथ ही पंड़ित शिव प्रकाश ओझा(सागर) श्रीमद् भागवत कथा का वाचन भी करेंगे।

महायज्ञ के अध्यक्ष पं दाऊ ओझा झालापट्टा यागिक सम्राट ने बताया कि महायज्ञ के साथ भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ का कार्यक्रम भी होगा एवं 4 जनवरी रविवार को महायज्ञ के उद्घाटन सुबह 10 बजे होगा। इसमें  1008 निर्वाण पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी   विशोका नन्द भारतीजी महाराज बीकानेर राज गुरु पधारेंगे।

पंड़ित देवी प्रसाद ओझा के अनुसार यज्ञ पुरुष स्वयं भगवान विष्णु का रूप हैं—“यज्ञो वै विष्णुः”—और जब कोई भक्त श्रद्धा, शुद्ध मन तथा संकल्प पूर्वक यज्ञ में सम्मिलित होता है, तब वह केवल हवन नहीं करता, वह अपनी समस्त विकृतियों को अग्नि में समर्पित कर अंतःकरण को निर्मल करता है।
कलियुग का अंधकार तभी छटता है जब यज्ञ की लौ प्रज्वलित होती है।
यज्ञ से मन पवित्र होता है, बुद्धि निर्मल होती है, हृदय करुणामय बनता है और जीवन में धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष—चारों पुरुषार्थ सहज प्राप्त होते हैं।
यज्ञ मनोकामनाएँ पूर्ण करता है क्योंकि वह इच्छा को ईश्वर की इच्छा में समर्पित कर देता है।
यज्ञ वातावरण को शुद्ध करता है और आत्मा को संस्कारित करता है। यज्ञशाला की परिक्रमा मात्र से अनेक जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं।

 

 

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