
बीकानेर, निडर इंडिया न्यूज।
“बासो तो बसियो ऐ राणी गवरजा ए बाई गवरजा…” सरीखे गीतों से शहर की गलियां इन दिनों गूंज रही है। अवसर है बालि गवरजा पूजन का। दोपहर के बाद में गली-गुवाड़ में बालिकाएं दातणियां देने की परम्परा निभा रही है, तो शाम को बासो देने की परम्परा है। गणागौर माता के बासो (पानी पिलाने और प्रतिमा के आगे भोग-प्रसाद लगाने) यह दृश्य इन दिनों शहर में हर ओर साकार हो रहे हैं। रात के समय कई मोहल्लों और घरों में इन दिनों पुरुष मंड़लियां भी गणगौर गीतों की प्रस्तुतियां दे रहे हैं। पूरा शहर मानो गणगौर की भक्ति सराबोर है।
जनता प्याऊ क्षेत्र में सामूहिक रूप से दिया बासा
जनता प्याऊ क्षेत्र में शनिवार को महिलाओं ने सामूहिक रूप से एकत्रित होकर गणगौर माता के बासा देने की परम्परा का निर्वाह किया। इस दौरान आस्थावान महिलाओं ने गणगौर का खोळ भरा। माता रानी के आगे मिठाई, नमकीन, कोल्ड ड्रिंक्स सहित भोग प्रसाद लगाया। महिलाओं ने गणगौर का पानी पिलाने की परम्परा भी निभाई। इसमें बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी रही। साथ ही एक ही स्थान पर शृंगारित गणगौर प्रतिमाओं को बिठाया गया। गीतों के माध्यम से गणगौर माता को रिझाया और परिवार में सुख समृद्धि की कामना की।
