कोलकाता.बीकानेर, निडर इंडिया न्यूज।

कोलकाता महानगर में प्रवासी पुष्करणा समाज के लोग एक नवंबर को ही दीवाली मनाएंगे। इसके लिए पूर्व में समाज के विद्वान पंड़ितों ने एक मत से निर्णय किया था, उसी कड़ी में आज (शुक्रवार) एक सामूहिक बैठक आनंद भैरव मंदिर में रखी गई। इसमें समाज के विद्वान, पंचागकर्ता, वेदपाठी पंडितों ने अपने सुझाव रखे और सर्व सम्मति से 1 नवंबर को ही दीवाली मनाने का निर्णय किया।

इसके तर्क और प्रमाण भी पेश किए। विद्वानों ने एक स्वर में कहा कि अगर दोनों दिन अमावस्या प्रदोष काल में व्याप्त हो तो दूसरे दिन वाली अमावस्या ग्रहण करनी चाहिए। पंड़ितों के अनुसार इस वर्ष अमावस्या पहले दिन यानि 31 अक्टूबर को 3 बजकर 53 मिनट से शुरू होकर, अगले दिन 1 नवंबर को शाम 6 बजकर 17 मिनट तक है। विद्वानों ने धर्म सिंधु पंचाग का प्रमाण देते हुए उसके हवाले से कहा कि दूसरे दिन 1 नवंबर 2024 को अमावस्या सूर्यास्त के बाद 1 घटी (24 मिनट) तक व्याप्त है। इसलिए उसी दिन दीपावली मनाना शास्त्र सम्मत है।
पुष्करणा पंडित समाज बैठक में पंडित शिव किशन किराडू, सुरेंद्र ओझा ,जितेंद्र आचार्य (गृहस्थ पंचांग) ,प. दाऊ ओझा झालापट्टा(प्रकाशक धर्म सागर पंचांग) मनीष पुरोहित(श्री राधे पंचांग) किशन व्यास , शिव कुमार किराड़ू, नवरत्न कल्ला, मनोज बिस्सा (गुड्डू), राहुल थानवी, गोपाल व्यास ,सागर ओझा, दाऊ व्यास सहित पंड़ितों ने अपनी विचार रखे। वहीं पुष्करणा समाज के वयोवृद्ध पंड़ित कालीदास किराडू ,विश्वनाथ व्यास और संजय बिस्सा की और से सहमति प्रदान की गई।






