अमावस्या के दिन होगी पूर्णाहुति, हेमाद्री संकल्प कराया जाएगा

बीकानेरNidarindia.com श्राद्धपक्ष शुक्रवार से शुरू हो गए। अब एक पखवाड़े तक मांगलिक कार्यक्रमों पर ब्रेक रहेगा। वहीं पितरों की तृप्ति के लिए तालाबों पर तर्पण के अनुष्ठान भी शुरू हो गए। यह क्रम एक पखवाड़े तक चलेगा। धरणीधर तालाब पर कर्मकांड़ी पंडि़त नथमल पुरोहित के शिष्य पंडि़त गोपाल ओझा के सान्निध्य में तर्पण कर्म कराया जा रहा है। ओझा के अनुसार 14 अक्टूबर (अमावस्या) के दिन इस अनुष्ठान की पूर्णाहुति होगी।
सुबह होगा अभिषेक पूजन
गोपाल ओझा ने बताया कि अंतिम दिन अल सुबह पांच बजे से धरणीधर महादेव का अभिषेक पूजन होगा। इसके बाद ६ बजे से तालाब पर तर्पण क्रम शुरू होगा। इसमें हेमाद्री संकल्प, दस विधि स्नान कर्म और तर्पण होगा। इसके बाद सुबह 10 बजे से महानंद महादेव मंदिर की यज्ञशाला में पितरों के निमित हवन होगा। इसमें सभी श्रद्धालु भागीदारी निभाएंगे।

तीन पारियों चल रहा तर्पण
धरणीधर तालाब पर पंडि़त गोपाल ओझा के सान्निध्य में तीन पारियों में तर्पण कराया जा रहा है। इसमें पहला चरण सुबह 5 से 6, दूसरा 6 से 7 और तीसरा चरण 7 से 8 बजे तक चलता है। इसी तरह पंडि़त नवरतन व्यास के सान्निध्य में भी तालाब के दूसरे छोर पर तर्पण कर्म कराया जा रहा है। इसमें भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भागीदारी है। श्रीरामसर रोड स्थित राधा गार्डन में कन्नू मंडल की ओर से तर्पण कर्म किया जा रहा है। इसके अलावा आस्थावान लोग अपने घरों, मंदिरों और तालबों पर तर्पण कर्म श्राद्ध पक्ष में करते है।

ऋषिकेश में चल रहा अनुष्ठान
कर्मकांडी वयोवृद्ध पंडि़त नथमल पुरोहित के सान्निध्य में उत्तराखंड के ऋषिकेश में गंगा के तट पर आज से तर्पण अनुष्ठान शुरू किया गया है। इसमें शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु बीकानेर से ऋषिकेश गए है।
खास महत्व बताया गया है
कहते है श्राद्ध पक्ष में पितरों को तर्पण अर्पित करने का खास महत्व है। आस्थावान लोग अपने पूर्वर्जो (पितरों) की तृप्ति के लिए तालाबों पर जाकर तर्पण अनुष्ठान करते है। पंडि़त राजेन्द्र किराड़ू के अनुसार धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष के दौरान पितर संबंधित कार्य करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसीलिए अपने पूर्वजों को याद करके पितृ पक्ष में श्राद्ध कर्म किया जाता है। सर्व सुलभ जल,तिल, यत्र, कुश, अक्षत, पुष्प आदि से उनका श्राद्ध सम्पन्न किया जाता हैं।
यह है खास महत्व:
शास्त्रीय मर्यादा के अनुसार श्राद्ध का अर्थ है, श्रद्धा से जो कुछ किया जाता है। भाद्रपक्ष की पूर्णिमा से अश्विनी कृष्ण अमावस्या तक के पक्ष में पितरों के प्रति उनकी संतुष्टि के उद्देश्य के लिए गरुड़ पुराण के अनुसार श्रद्धापूर्वक श्राद्ध, तर्पण, पिण्डदान, पितृयज्ञ, ब्राह्मण भोजन आदि श्रेष्ठ कार्य किए जाते है। इससे पितर प्रसन्न होकर मनुष्यों को आयु, यश, पुत्र, कीर्ति, पुष्टि वैभव, धन-धान्य प्रदान करते है।






