मां की ममता जैसी महिमा तीनों लोकों में नहीं : वसंत विजयानंद गिरि - Nidar India

मां की ममता जैसी महिमा तीनों लोकों में नहीं : वसंत विजयानंद गिरि

चैत्र नवरात्रि में देवी भागवत, हवन यज्ञ अनुष्ठान में रामनवमी पर भक्तों को कराए अलौकिक साक्षात हनुमानजी के दर्शन

बीकानेर, निडर इंडिया न्यूज। 

नोखा रोड स्थित अग्रवाल भवन शुक्रवार को भक्ति सरिता में डूबा नजर आया। अवसर था देवी भागवत के दौरान परिसर में बने अस्थायी राम मंदिरों में आज विशेष रूप से 350 किलो दूध पेड़ों का भोग लगाया गया।

श्रीकृष्णगिरी शक्तिपीठाधीपति जगद्गुरु वसंत विजयानंद गिरि महाराज के श्रीमुखारविंद से  दुर्लभ सिद्ध बीज मंत्रों का उच्चारण प्रारंभ हुआ तो आयोजन स्थल पर भव्य पांडाल में मानो हज़ारों श्रद्धालुओं की हनुमान जी के प्रति श्रद्धा और भक्ति साकार हो उठी। पंडाल गगनचुंबी जयकारों से गूंज उठा।

महज ग्यारह दिनों के लिए बने अस्थाई रुप से प्रभु श्रीराम परिवार के मंदिर में 3500 किलो दूध पेड़े का भोग अर्पण कर ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित हुआ। इससे पहले सुबह के सत्र में विधिवत् जिबू कॉइन व पायरेट लक्ष्मी कुबेर यंत्र साधना शिविर में नौवें दिन भी क्रमबद्ध पूजा जाप आराधना जारी रही। दोपहर में सर्व सिद्धि प्रदायक, समस्त देवी देवताओं की प्रसन्नता के लिए श्रीमहालक्ष्मी महायज्ञ हवन में पूज्य जगद्गुरु वसंत विजयानंद गिरि महाराज की निश्रा में पूर्णतया शास्त्रोक्त वैज्ञानिक दृष्टिकोण से काशी के विद्वान विप्र पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रों के साथ आहुतियां दी गई।

इस दौरान वसंत विजयानंद गिरि महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा कि हर कथा, भागवत आदि में देवताओं की विशेषता, महिमा होती है, लेकिन श्रीआदिशक्ति जगतजननी भगवती मां पद्मावतीजी की कथा में जो ममता है वह तीनों लोकों में नहीं है। उन्होंने इस मौके पर भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव दिवस विशेष की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज के दिन किए हुए हर सुकृत कार्य, साधना–आराधना का फल अवश्य मिलता है।

वातावरण की अनुकूलता देखकर कार्य करने वाला व्यक्ति सफल होता ही है। शाश्वत कल्याण करने वाली राजराजेश्वरी मां के नाम को बीज बताते हुए जगद्गुरु  वसंत विजयानंद गिरि   महाराज ने कहा कि इसे बोने वाले व्यक्ति को अनंत प्रकार के फल सुख, समृद्धि, ऐश्वर्य के रुप में प्राप्त होते ही है। उन्होंने कहा कि प्रयत्न करके कुछ पाया तो उसे मेहनत का फल मानते हैं, बगैर प्रयास के स्वत: मिल जाए उसे भाग्य कहते हैं इसी प्रकार मां के दरबार में, संतों के चरणों की निश्रा प्राप्त होना भाग्य खोलने के समान ही है।

महाराज ने कहा कि कथा से तात्पर्य पंडित बनाना नहीं, बल्कि भक्त बनाना है और जो भक्त बन गया वह परमात्मा का है। उपस्थित श्रद्धालुओं को गारंटी के साथ परमात्मा की शक्ति देने की बात के साथ इसके लिए मात्र श्रद्धा और विश्वास से भक्ति करने की जरूरत है। वे बोले मां की कथा आपके जीवन की विभिन्न प्रकार की व्यथा, दुख, संकट व बाधाओं को तो मिटाएगी ही श्रेष्ठ संस्कारों के साथ उज्जवल भविष्य का मार्ग प्रशस्त करेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि जिस शक्ति स्वरूपा मां की उपासना स्वयं ब्रह्मा, विष्णु, महेश करते हो, ऐसी जगतजननी भगवती का नाम यदि संसारी ले ले तो जीवन सर्वोत्तम निश्चित बनेगा। उन्होंने इस दौरान बताया कि चैत्र नवरात्रि में नवम दिवस मां सिद्धिदात्री, जो सभी सिद्धियों की दात्री है। सफलता, सिद्धि और पूर्णता प्रदान करने वाली मां सिद्धिदात्री की देवताओं और ऋषियों ने भी आराधना कर ही अनेक सिद्धियां प्राप्त की।

वसंत विजयानंद गिरि महाराज के राजस्थान प्रांत में बीकानेर में पहली बार पदार्पण के साथ इस भव्य ऐतिहासिक आयोजन में काशी के विद्वान पंडितों द्वारा नौ कुंडीय हवन यज्ञ में विभिन्न मेवे, स्वर्ण, रत्न, औषधियां, चन्दन इत्यादि की बीज मंत्रों से आहुतियां दी गई। साथ ही साथ बड़ी संख्या में दूसरी बार सामूहिक गुरुदीक्षा पूज्य जगद्गुरु प्रदान कर भक्तों को लाभान्वित किया। इस दौरान उन्होंने हमेशा की भांति यह भी घोषणा की कि कि गुरु दीक्षा से प्राप्त समस्त दक्षिणा यहीं की गौशालाओं में ही भेंट की जाएगी।

 

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