दुख दरिद्रता को मन से निकालने पर जीवन में सुख समृद्धि आएगी : वसंत विजयानंद गिरि - Nidar India

दुख दरिद्रता को मन से निकालने पर जीवन में सुख समृद्धि आएगी : वसंत विजयानंद गिरि

बीकानेर, निडर इंडिया न्यूज। 

गंगाशहर रोड स्थित अग्रवाल भवन परिसर पूरी तरह से भक्तिमय महाैल में डूबा नजर आ रहा है। अवसर है  चैत्र नवरात्रि महोत्सव का। जहां पर देवी मां पद्मावतीजी की प्रतिदिन दोपहर के सत्र में विभिन्न बीज मन्त्रों, सहस्त्रनाम स्तोत्र पाठ के साथ 9 कुंडो में दुर्लभ औषधियों, गाय के शुद्ध देशी घी व मेवे इत्यादि की आहुतियों से हवन में आहुतियां दी जा रही है।    शक्तिपीठाधीपति, जगद्गुरु वसंत विजयानंदगिरी महाराज की पावन निश्रा में पर्व चल रहा है। इसमें भागीदारी निभाने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं।

मंगलवार के प्रवचन में संत विजयानंदगिरी महाराज ने कहा कि व्यक्ति की हर क्रिया का फ़ल प्रतिक्रिया के रूप में मिलता है। यदि नहीं मिलता है तो निश्चित ही उस क्रिया में ही गलती की संभावना है, जिसे सुधारना आवश्यक है।

इस मौके पर उपस्थित सभी भक्तों को लाल धागे में मंत्रोच्चारण के साथ 27 गांठों के साथ सिद्ध कर रक्षा सूत्र बनवाया गया, इसमें भी पहली एक गांठ पूज्य जगद्गुरु के मंत्रोच्चार से लगभग सभी लोगों के धागे में चमत्कारी रुप से स्वत: लगी। महाराज ने कहा हिंदू सनातन धर्म में प्रत्येक पर्व त्यौहार की अपनी वृहद स्तर की तेजोमय आध्यात्मिक, श्रद्धा भक्तिपूर्ण महिमा है।

उन्होंने कहा कि मन से संसार बनता है, मन में मस्ती है तो जीवन भी मस्त होगा। इसलिए दुख दरिद्रता को मन से निकालने पर जीवन में सुख समृद्धि निश्चित आएगी। इस दौरान दिवस विशेष को कृत्रिम जीवन नहीं जीने की सीख देते हुए श्रीमद् देवी भागवत महापुराण कथा वाचन में जगद्गुरु  वसंत विजयानंदगिरी  महाराज ने बताया कि देवी दुर्गा के नौ रूपों में से एक मां कात्यायनी, जो कि विवाह, प्रेम एवं मनोकामना पूर्ति की देवी है।

गोपियों ने भगवान श्रीकृष्ण को पाने के लिए इनकी पूजा की थी। आध्यात्म योगी वसंत विजयानंदगिरी महाराज ने कहा, संसार में जीने का तरीका आ जाए तभी व्यक्ति का मंदिरों, तीर्थ आदि में जाना व सत्संग प्रवचन सुनना सार्थक होगा। दया को धर्म का मूल बताते हुए पूज्य गुरुदेवश्रीजी वसंत विजयानंदगिरीजी महाराज ने यह भी कहा कि जहां दान धर्म होगा, वहां लक्ष्मीजी भी स्थिर रहेगी।

पार्श्व पद्मावती सेवा ट्रस्ट कृष्णगिरी ने आयोजित इस विराट कथा यज्ञ महोत्सव में प्रतिदिन तीन समय का भोजन प्रसाद में विविध व्यंजन भंडारे का क्रम भी देर रात्रि तक अनवरत चल रहा है।
ट्रस्टी डॉ संकेश छाजेड़ ने बताया कि कार्यक्रम में ब्रह्म गायत्री सेवाश्रम के अधिष्ठाता पं. रामेश्वरानंद  पुराेहित व बालोतरा से आए संत सनातनी महाराज शामिल हुए और विचार  रखे।

 

Share your love
Facebook
Twitter

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *