संस्कारों को बनाएं श्रेष्ठ तभी मनुष्य जन्म सही मायने में सार्थक : जगद्गुरु श्री वसंत विजयानंद गिरि जी महाराज - Nidar India

संस्कारों को बनाएं श्रेष्ठ तभी मनुष्य जन्म सही मायने में सार्थक : जगद्गुरु श्री वसंत विजयानंद गिरि जी महाराज

विधायक जेठानंद व्यास ने लिया जगद्गुरु वसंत विजयानंद गिरि महाराज का आशीर्वाद

बीकानेर,निडर इंडिया न्यूज। 

गंगाशहर राेड़ स्थित अग्रवाल भवन परिसर चल रहे विराट चैत्र नवरात्रि देवी भागवत कथा महालक्ष्मी यज्ञ महाेत्सव में प्रतिदिन  श्रद्धालू पहुंच रहे हैं।
वसंत विजयानंद गिरि महाराज के श्रीमुखारविंद से श्रीमद देवीभागवत महापुराण कथा गाथा का गुणगान से माहौल ऐसा भक्तिमय हो गया है कि मानो मां से साक्षात हो रहा है। सिद्ध साधक संत श्रीजी द्वारा सर्व रक्षा सुरक्षा प्रदायक शिव कवच वाचन के साथ कुमकुम सिद्धि विधान व सर्व कष्ट निवारक भैरव सहस्र नाम कष्टहरण ऊर्जा विधान का श्रवण कराया। साथ ही पूज्य जगद्गुरु के साथ साथ भजन गायकों द्वारा दी जा रही संगीतमय प्रस्तुतियां भी नवरात्रि पर्व की महिमा को चार चांद लगा रही है।

स्थानीय सहित देश के विभिन्न राज्य शहरों से आए भक्तजनों को लगभग 15 से 16 घंटे तक मां की भक्ति आराधना साकार रुप ले रही है।

उन्होंने कहा कि जो भी श्रद्धावान लोग आयोजन में शामिल हुए हैं वे निश्चित ही सनातन प्रेमी व स्वयं के सुख, प्रगति प्रदायक कल्याण के लिए आए हैं। इस दौरान संसार में दुखी, ऋणी तथा रोगी लोगों का जिक्र करते हुए वसंत विजयानंद गिरि महाराज ने कहा कि दुख का कारण झूठ बोलना व निंदा करना तथा गलती का स्वयं द्वारा नहीं मानना है। उन्होंने कहा, दुख मिटाना व आरोग्य प्राप्त करना है तो इसे सुधारें व संस्कारों को श्रेष्ठ बनाएं। तभी मनुष्य जन्म सही मायने में सार्थक बनेगा। वे बोले, व्यक्ति जीवन में विवेकहीन न बनते हुए अपने लक्ष्य उद्देश्य को भी जानें।

अधर्म का नाश होगा तभी होगी धर्म की जय : विधायक जेठानंद व्यास

जगद्गुरु  वसंत विजयानंद गिरि  महाराज के सान्निध्य में चल रहे यज्ञ महोत्सव और महालक्ष्मी महायज्ञ आध्यात्मिक महोत्सव में पहुंचकर विधायक जेठानंद व्यास आशीर्वाद लेने पहुंचे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की पताका फहराने का अलौकिक आयोजन पहली बार यहां पूज्यपाद जगद्गुरु यहां करवा रहे हैं। सनातन धर्म को पुरुष ही नहीं, स्त्री प्रधान भी है। वे बोले अधर्म का नाश होगा तभी धर्म की असल मायने में जय होगी। मातृ शक्ति को त्याग का प्रतीक व सनातन धर्म की धुरी बताते हुए उन्होंने युवा पीढ़ी में संस्कारों की महत्ती आवश्यकता व नशामुक्त रहने के संकल्प पर जोर दिया।

 

Share your love
Facebook
Twitter

Related News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *