कोलकाता, बीकानेर, निडर इंडिया न्यूज।



राजस्थान के साथ ही कोलकाता महानगर में भी गणगौर उत्सव की धूम है। यह पर्व कोलकाता में भी पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। विशेष रूप से महिलाओं और कुंवारी कन्याओं द्वारा गौरी माता की पूजा-अर्चना के रूप में मनाया जाता है और सौभाग्य व मंगलकामना का प्रतीक माना जाता है।
बंगाल की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा में भी महाशक्ति की उपासना का विशेष स्थान रहा है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए कोलकाता की प्राचीन गवरजा माता मंडली श्री बलदेव जी गवरजा सेवा ट्रस्ट की ओर से आयोजित कस्तूरी जयंती महोत्सव के उद्घाटन अवसर पर गीत-संगीत से जुड़े रचनाकारों को सम्मानित किया गया।


इस अवसर पर अतीत और वर्तमान के संगीत परंपरा को याद करते हुए दिवंगत गीतकारों एवं रचनाकारों—दिवंगत बालकृष्ण व्यास, जोशी निर्भीक और पंडित शंभू प्रसाद श्रीवास्तव को उनके गीतों के माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
कार्यक्रम में जोशी निर्भीक की स्मृति में उनके पुत्र महेंद्र जोशी को सम्मान स्वरूप प्रतिमा एवं अपर्णा ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। वहीं मंडली के लिए निरंतर रचनात्मक योगदान देने वाले युवा गीतकारों संजय बिन्नानी, राजकुमार डागा और अमिताभ माहेश्वरी को भी अपर्णा एवं गवरजा माता की प्रतिमा भेंट कर सम्मानित किया गया।
महोत्सव के तहत आगामी दिनों में माता की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी, जो संगीत मंडली के साथ गंगा तट पर जल अर्पित करने के बाद महानगर के विभिन्न मार्गों से होकर पुनः पूजा पांडाल में पहुंचेगी। यह आयोजन कोलकाता में राजस्थानी संस्कृति और आस्था का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।






