होली की रंगत : रम्मत के ख्याल गीतों से किया वर्तमान हालात पर कटाक्ष, निशाने पर रहे महंगाई, भ्रष्टाचार - Nidar India

होली की रंगत : रम्मत के ख्याल गीतों से किया वर्तमान हालात पर कटाक्ष, निशाने पर रहे महंगाई, भ्रष्टाचार

बारहगुवाड़ चौक में हुआ स्वांग मेहरी रम्मत का मंचन 

रमेश बिस्सा।

बीकानेर, निडर इंडिया न्यूज। 

ये ट्रंप जो टैरिफ लाया, भारत को आंख दिखाया, नहीं देश कभी घबराया, अपना परचम लहराया…पाकिस्तानी घुसपैठ्यों रा कर दिया पता साफ हो..हो…कर दिया सूपड़ा साफ…” सरीखी चेतावनी भरे ख्याल गीतों ने बारहगुवाड़ में होली रसिको रातभर बांधे रखा।

अवसर था श्री जबरेश्वर लोक नाटय एवं कला संस्थान के तत्वावधान में आयोजित स्वांग मेहरी रम्मत के मंचन का। रम्मत के कलाकारों ने कड़ी मेहनत से इस बार कटाक्ष करने वाले तीखे व्यंग आधारित ख्याल गीतों की रचना की। उनको गायन शैली में नगाड़ों की ताल के साथ स्वरबद्ध कर मंच पर साकार किया, तो सैकड़ों होली रसिकों ने तालियां और हुटिंग करके उनका हौसला भी बढ़ाया। विदेशी ताकतों को चेतवानी भरे गीतों से सचेत करने के साथ ही अपने देश में फैल रहे भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और मंहगाई के लिए देश के नेताओं को भी व्यंग्य बाणों के जरिए फटकारा।

रम्मत के ख्याल गीतों की एक बानगी देखिए..”.क्या लोकतंत्र री माया, थे वेष बदलकर आया…बंद कर दो जुमलेबाजी…ऊपर से चमड़ा चोखा है, भीतर से रंग अनोखा है, नेता बणते दे धोखा, मिलते ही ढक लेवे गोखा है…शब्दों के तीखे बाणों से देश के नेताओं के असली चेहरो को उजागर करने का प्रयास किया। साथ ही संदेश दिया कि जनता नेताओं के कारनामे अब जान गई है। रम्मत के चौमासा गीतों ने सभी को मंत्रमुग्द कर दिया। इसमें लावणी ‘गीत भी बहुत सुंदर है, जो लोगों को बांधे रखते हैँ।

इनकी रही भागीदारी…

रम्मत के मंच पर सबसे पहले गणेशजी का पदार्पण हुआ। कलाकारों ने स्तुति गान कर गणेशजी को रिझाया। रम्मत में ख्याल गीतों के रचियता चंद्रशेखर ओझा(चोर सा), विजय कुमार ओझा, महेन्द्र ओझा है। वहीं रम्मत के मंचन में जुगल किशोर ओझा(पुजारी बाबा), नवल उपाध्याय, काशीनाथ, विजय कुमार, चंद्रशेखर, राम अवतार, शिवदत्त, गोपाल दास, संजीव, संदीप, अशोक, ज्ञानू, आनंद, भोली, जूनी, मीनू , बटुक, गणेश, जितेन्द्र, शिवदत्त, आनंद कुमार, मुकेश, मूलचंद, नंदलाल, कैशव किराड़ू, आदित्य, किशन छंगाणी, संदीप, पीयूष छंगाणी, लाला बाबू सहित ने भागीदारी निभाई। वहीं नगाड़ों पर कानू किराड़ू और हारमोनियम पर आनंद ने संगत की।

 कान्हा से चहुलबाजी…

रम्मत के लावणी गीतों में कृष्ण की भक्ति और गोपिकाओं से चहुलबाजी को सुंदर शब्दों में पिरोया गया है।  ‘श्याम सुंदर के प्रेम हिन्डोले मन ही मन झूली, हारे पडी पांव में जाय धरी सिर चरणन की धुली…बरसाने से चली राधिका संग ले बृज बाला…लावणी गीतों से बृज की झलक को साकार किया गया।

वहीं चौमासा से नायिका की पुकार सामने आई। “अषाढ़ रंगीला चढ़ आया चौतरफा बादल छाया  है..किरसानी मन हरखा कर के तेजा और मूमल गाया है…” संस्थान के विजय कुमार ओझा ने बताया कि रम्मत रियासतकालीन है, इसका मंचन लगातार चला आ रहा है।

 

Share your love
Facebook
Twitter

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *