मां आशापुरा के दर्शन करने उमड़ा पूरा शहर, आज सुबह तक चला मंचन

बीकानेर, निडर इंडिया न्यूज।
‘माता मैं पुत्र हूं, सो समझ मन माहि…चढ़ू पिता की सैज पर, पलट जमाने जाहिं…” खंभन पृथ्वी के लगे, कहत वेद विख्यात, नभ धरणी दोनों खड़े, माता सत के साथ…भक्त पूरणमल ने अपनी माता फूलंदे को नीति, न्याय और धर्म का पाठ पढ़ाया। लेकिन वासना के मद में डूबी रानी फूलंदे ने बेटे की एक नहीं सुनी और जल्लादों को आदेश देकर हत्या करवा दी।
सत्य की राह पर चलने और ब्रह्मचारिय की पालना करने वाले ऐसे भक्त की कथा गुरुवार की रात को बिस्सा चौक में साकार हो उठी। अवसर था आशापुरा नाट्य एवं कला संस्थान के तत्वावधान मंचित हुई भक्त पूरणमल रम्मत का।

रम्मत के अखाड़े में सबसे पहले मां आशापुरा का अवतरण हुआ, तो पूरा चौक मैया तेरी जय बोलेंगे…सरीखे जयकारों से गूंज उठा। सैकड़ों की भीड़ मां आशापुरा के दर्शन करने के लिए उमड़ पड़ी। हालात ऐसे हुए कि चौक में पैर रखने की जगह नहीं मिली, वहीं मोहल्ले के सभी घरों की छतें भी महिलाओं और बच्चों की भीड़ से अट गए। रात करीब 12 बजे मां आशापुरा का मंच पर अवतरण हुआ। करीब एक घंटे तक मां रम्मत के मंच पर रही, इस दौरान श्रद्धालुओं ने धोक लगाकर शुभ मंगल का अशीर्वाद मांगा।

खाखी आयो धूम से…
मां आशापुरा के प्रस्थान के बाद मंच पर खाखी आया तो, माहौल में मस्ती सी छा गई। चोरों गूंज उठा खाखी आयो धूम से…कपड़ा धोवे…। लोगों ने हंसी-ठिठोले किए । इसके बाद जोशी-जोशण ने जमाने की बात कही।
रात गहराने के बाद मंच पर मुख्य पात्रो का आगमन हुआ। इसमें राजा शंखपति, फुलंदे, अम्बादे, भक्त पूरणमल, गोरखनाथ, बांदी सहित पात्रों ने मंच को साकार किया। कथानक के अनुसार मां-बेटे के संवाद का तानाबना रातभर चला, आखिर मां फुलंदे रानी थी, तो उसने बेटे को मरवा कर जंगल में फेंक दिया। अपने पुत्र का शव देखकर उसका माता अम्बा दे जंगल में विलाप करने लगी, उधर से गुजर रहे गुरु गोरख नाथ ने भक्त को पुन: जीवित कर दिया। इस तरह के नाटकीय घटनाक्रम के बाद अंत में सभी की कुशलक्षेम के लिए “माता ऐ म्हारे टाबरियो रे ठंड़ रा झाला दे वो रे…की स्तुति के साथ पूरे शहर, परिवार की खुशहाली की कामना की गई।
इन्होंने निभाई भूमिका..
कृष्ण कुमार बिस्सा, रामकुमार बिस्सा, मनोज व्यास, प्रेम कुमार गहलोत, गोविन्द गोपाल बिस्सा, विष्णु, महेन्द्र, मनीष, इंद्र कुमार के साथ ही नगाड़ों पर मनीष व्यास ने भागीदारी निभाई।
सभी फोटो : यादवेन्द्र व्यास (बबलू)
पानी की मार से लाल होगी पीठ, डोलची मार खेल कल
रियासकाल से चला आ रहा हर्ष्-व्यास जाति के बीच डोलची मार पानी का खेल शनिवार को हर्षों की ढलान पर खेला जाएगा। इस दौरान दोनों तरफ पानी के बड़े-बड़े कड़ाव रखे जाएंगे। फिर चमड़े से बनी डोलची से एक दूसरे की पीठ पर पानी से वार किया जाएगा। इस खेल को देखने के लिए बड़ी संख्या में अन्य मोहल्लों के लोग भी शामिल होंगे। पानी खेल की तैयारियों को अंतिम रूप् दिया जा रहा है।
फागणिया फुटबॉल का रोमांच कल
होली की रंगत और दुगना करने के लिए कई तरह के कार्यक्रम होते हैं। इसमें धरणीधर मैदान में शनिवार को फागणिया फुटबॉल मैच का आयोजन होगा। आयोजन को लेकर समिति के कन्हैयालाल रंगा, सीताराम कच्छावा, गोपाल हर्ष, दुर्गा शंकर आचार्य, गिरिराज पुरोहित,अशोक सोनी, जुगल किशोर जोशी सहित कार्यकर्ता सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं।






