बीकानेर, निडर इंडिया न्यूज।

खेजड़ी बचाने किल चल रहे आंदोलन के समर्थन में सेवादल कांग्रेस ने भी अपना समर्थन दे दिया है। बुधवार को नत्थूसर गेट के बाहर स्थित बड़ा गणेश जी मंदिर में सेवादल की ओर से विष्णुयज्ञ का आयोजन किया गया। इस आयोजन के माध्यम से सरकार की सद्बुद्धि के लिए भगवान विष्णु से प्रार्थना की गई।
कांग्रेस सेवा दल के प्रदेश उपाध्यक्ष कमल कल्ला ने बताया कि भगवान विष्णु सृष्टि का पालन करता है और वही सृष्टि में सद्बुद्धि देता है इसलिए आज यज्ञ के माध्यम से भगवान विष्णु से प्रार्थना की गई है कि वह राज्य व केंद्र सरकार को सद्बुद्धि दे और राजस्थान का राज्य वृक्ष खेजड़ी बढ़ाने की मानसिकता सरकार में बैठे नेताओं पर अधिकारियों में पैदा करें।

कमल कल्ला ने कहा कि जब सरकार से और मनुष्यों से उम्मीद समाप्त हो जाती है तब हमारे पास ईश्वर की शरण में जाने के अलावा कोई उपाय नहीं रहता है सरकार से बार-बार निवेदन करने के बाद और ज्ञापन देने के बाद भी जब खेजड़ी की कटाई को रोक नहीं गया और प्रदेश में लाखों की संख्या में खेजड़ी के पेड़ काट दिए गए तब यह आंदोलन सड़कों पर आया।
इस राज्य में जो संस्कृति बचाने और संस्कृति संरक्षण के नाम पर सत्ता में आई है उसमें भी राजस्थान की पर्यावरण की सांस्कृतिक प्रतीक खेजड़ी संकट में है, उम्मीद है कि भगवान विष्णु सरकार को सद्बुद्धि देगा और राजस्थान की धरती का श्रंगार खेजड़ी बच पाएगी।
इस अवसर पर शहर अध्यक्ष अनिल व्यास ने कहा कि केंद्र और राज्य में भाजपा की सरकार है और यह सरकार हिंदू हित और सनातन संस्कृति के नाम पर ही सत्तासीन हुई। ऐसे में जनता को उम्मीद थी कि सरकार सनातन और सांस्कृतिक प्रतीकों के साथ खिलवाड़ नहीं करेगी लेकिन सरकार ने अपने धन्ना सेठों के फायदे के लिए राजस्थान का राज्य वृक्ष खेजड़ी दाव पर लगा दिया जिसे किसी भी सूरत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। विश्नोई समाज के गुमान राम ने गुरु जाम्बेश्वर की शब्द वाणी का वाचन हुए कहा कि राजस्थान के लोगों के लिए खेजड़ी अपनी जान से ज्यादा कीमती है। इस अवसर पर विश्नोई समाज के बनवारी बिश्नोई, गुमान राम बिश्नोई,मनोज बिश्नोई, सुरजाराम पंचारिया,सोहनलाल उपाध्याय, मगनलाल पाणेचा, चंद्रशेखर राठौर,मनीराम चौधरी मौजूद रहे। वहीं सेवादल के तेजकरण हर्ष, सुखदेव नाथ,मनोज कल्ला, बसंत व्यास, पाठा महाराज, रत्ना महाराज, गोपाल किराडू, राजाल्डो बोहरा, असलम भाई, बाबू खान सहित सभी सेवा दल औऱ समाज़विदों व परियावर्ण प्रेमी शामिल हुए।






