रेलवे : ताकि कोहरे में भी सुगम रहे यातायात, सभी ट्रेनों में लगाए फोग डिवाइस - Nidar India

रेलवे : ताकि कोहरे में भी सुगम रहे यातायात, सभी ट्रेनों में लगाए फोग डिवाइस

बीकानेर, निडर इंडिया न्यूज। 

सर्दी के मौसम में इन दिनों घने कोहरे के चलते लंबी दूरी की कई ट्रेनें अपने निर्धारित समय से दूरी पहुंच रही है। खासकर कोहरे का असर उत्तर भारत में अधिक है। रेलवे प्रबंधन ने कोहरे में सुरक्षित और सुगम सफर रहे इसके लिए फोग डिवाइस का सहारा लिया जा रहा है।

उत्तर-पश्चिम रेलवे के बीकानेर मंडल पर सर्दियों के मौसम में विशेष तैयारियों के साथ रेल संचालन किया जा रहा है। सर्दियों के मौसम में कम तापमान से रेल लाइन के सिकुड़ने की संभावना रहती है। ऐसे में मंडल पर कुल 281 पैसेंजर ट्रेनों और लगभग 140 गुड्स ट्रेनों में लोको पायलटों को फोग डिवाइस दी गई हैं , जो कि कोहरे के समय लोको पायलट को सिग्लन के सम्बंध में सही सूचना देती हैं ।

वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक भूपेश यादव के अनुसार बीकानेर मंडल पर कुल 559 फोग डिवाइस हैं जो कि पूर्णत: कार्यशील अवस्था में है। गौरतलब है कि बीकानेर मंडल की सभी ट्रेनें फोग डिवाइस के साथ संचालित की जा रही हैं । यह फोग डिवाइस यह सूचना देती है कि अब आगे कौनसे प्रकार का सिग्नल आने वाला है। यह डिवाइस लगभग 9999 मीटर से पहले ही लोको पायलट को आने वाले सिग्नल के बारे में सूचित करना शुरू कर देती है, इससे लोको पायलट अपनी गाड़ी की गति को नियंत्रित करते हुए आगामी सिग्नल को सुरक्षित पार करने के लिए तैयार रहता है। इस प्रकार यह रेल संचालन में एक श्रेष्ठ डिवाइस साबित होगी।

बीकानेर मंडल का रेवाड़ी से बठिंडा रेलखंड एवं भटिंडा से सूरतगढ़ रेलखंड विशेष रूप से फोग से प्रभावित रहता है। फोग डिवाइस के अलावा रेलपथ पर गुड्स वार्निंग बोर्ड की दक्षता बढ़ाने के लिए रेडियम की स्ट्रिप लगाई गयी है, और चूना पट्टी की व्यवस्था की गयी है , ताकि लोको पायलट आसानी से धुंध की स्थिति समझ सके, ये बिटविन सेक्शन में लगाई जाती है।

इसके साथ ही रेल पथ पर रात्रिगश्त के लिए ट्रेकमेन्टेनर की ड्यूटी लगाई गयी है ,ताकि सर्दी में होने वाले रेललाइन फैक्चर की सूचना तुरंत मिल सके एवं खतरे की स्थिति को टाला जा सके, इस हेतु ट्रैक मेंटेनर को डेटोनेटर दिए गये हैं, इन डेटोनेटर को ट्रैकमेंटेनर रेललाइन फैक्चर होने पर गाड़ी आने की दिशा में एक निश्चित दूरी (600 मी. व 1200 मी.)पर रेललाइन पर फिट करता है, ताकि जब इंजन के व्हील इस डेटोनेटर के ऊपर से गुजरते हैं, तो डेटोनेटर तेज आवाज के साथ फूटता है और लोको पायलट इस आवाज को सुनकर गाड़ी की गति को नियंत्रित करते हुए खतरे के स्थान से पहले ही गाड़ी रोक देता है, प्रकार खतरे को टाला जाता है। इसके साथ ही लोको पायलट को आने वाले स्टेशन के होम सिग्नल की सूचना देने के लिए प्रत्येक स्टेशन पर पॉइंट्समैन को डेटोनेटर दिए जाते हैं, जिन्हें पॉइंट्समैन होम सिग्नल से गाड़ी आने की दिशा में निश्चित दूरी पर रेल पटरी पर लगाता है, जिस पर जब इंजन के व्हील (पहिए) गुजरते हैं, तो इंजन के भारी दबाव के कारण डेटोनेटर तेज आवाज के साथ फूटता है, इस तेज आवाज को सुनकर लोको पायलट समझ जाता है, कि आगे सिग्नल आने वाला है और अपनी गाड़ी की गति को नियंत्रित करता है एवं सिग्नल को सुरक्षित पार करने के लिये तैयार रहता है ।

इस प्रकार बीकानेर मंडल सर्दियों में कोहरे या सर्दी के मौसम में आधुनिक तकनीकी के माध्यम से बेहतर रेल संचालन कर रहा है l उल्लेखनीय है की रेल मंडल यात्रियों की सुरक्षित यात्रा को लेकर सजग है।

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