आस्था : गीता में है जीवन का सार, इसे पाठ्यक्रम में लागू करना चाहिए,बोल-विमर्शानंदगिरि महाराज, देखें वीडियो... - Nidar India

आस्था : गीता में है जीवन का सार, इसे पाठ्यक्रम में लागू करना चाहिए,बोल-विमर्शानंदगिरि महाराज, देखें वीडियो…

शिवबाड़ी मंदिर परिसर में चल रहा है सात दिवसीय गीता-सत्संग, कल होगी पूर्णाहुति

रमेश बिस्सा

बीकानेर, निडर इंडिया न्यूज। 

स्वामी विमर्शानंदगिरि महाराज ने कहा है कि गीता में जीवन का असली सार है। यह गीता ही है, जो कर्तव्य बोध कराने वाला ग्रंथ है। गीता सत्संग के दौरान बुधवार को निडर इंडिया से बातचीत में महाराज ने सत्संग के महत्व पर प्रकाश डाला। श्री लालेश्वर महादेव मंदिर के महंत विमर्शानंद महाराज ने बताया कि गीता सत्संग कथा की पूर्णाहुति गुरुवार को होगी।

उन्होंने कहा कि “जीवन में  सतोगुण बढ़ाने की कला” कथा का विषय रखा गया है। ताकि समाज में शाकाहार, सकारात्मकता, सद व्यवहार और सबसे अहम है सतो गुण का संदेश दिया जाए। महाराज ने कहा कि गीता सर्व प्रथम जी मात्र को मनुष्य बनाती है, जो मनन करता है, वो मनुष्य होता है। जिसमें जिज्ञासा होती है।

यह भगवान की वाणी है। आज 5 हजार 222 वर्ष हो गए, हर साल गीतां जयंती मनाई जाती है। महाराज ने कहा कि गीता को स्कूलों के पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाना चाहिए, सरकार को इस पर मनन करना चाहिए। महाराज ने बताया कि बीते 30 साल से गीता ज्ञान परीक्षा हो रही है। इसमें लगभग 5 लाख विद्यार्थी भागीदारी निभा चुके हैं। इसकी नींव परम आदरणीय, पूज्य गुरूजी संवित सोमगिरी महाराज ने रखी थी, उनके सान्निध्य में  बीकानेर ही नहीं प्रदेशभर में गीता के प्रति बच्चों में भी जिज्ञासा है।

उन्होंने कहा कि कलयुग में संसार में तमो गुण का प्रभाव है। आज भोजन सात्विक नहीं, कर्म,क्रिया भी बदल रहे है। महाराज ने कहा कि आहार की तो क्या बात करें, आज मांसाहार का सेवन मनुष्य को पशु बना रहा है।

महाराज ने कहा कि आमजन को इस बात का गर्व होना चाहिए कि वे भारत में जन्म हुआ है। केवल भारतीय संस्कृति में ही चार वर्ण की व्यवस्था है। लेकिन आज इस पर विदेशी शोध कर रहे हैं। जर्मनी में आयुर्वेद पर शोध चल रहा है। भारतीय संस्कृति में ईश्वर के समीप जाने, उसको पाने की क्षमता है। परम पुरुषार्थ मोक्ष है, सभी लोग 16 संस्कारों को निभाते है हुए।

वर्ष 2021 से महंत पद का दायित्व संभाल रहे है…

स्वामी विमर्शानंदगिरि महाराज की बचपन से ही सेवा, साहित्य, सत्संग और पुस्तक संग्रह में रूचि रही है। प्रारम्भिक शिक्षा मोन्टेसोरि स्कूल, फोर्ट स्कूल में हुई। आपने वर्ष 1990 में विज्ञान स्नातक, एलएलबी, एलएलएम,एम.ए.एमफिल की उपाधि राजकीय डूंगर कॉलेज बीकानेर से हासिल की। इसके बाद टोंक स्थित राजीव गांधी विधि महाविद्यालय में अध्यापन भी किया है।  इसके बाद 9 मई 2019 में स्वामी संवित‌् सोमगिरिजी महाराज से जगद्गुरु आद्य शंकराचार्य महााराज द्वारा प्रवर्तित “परमहंस संन्यास” की दीक्षा ग्रहण की। पूज्य गुरुदेव के सान्निध्य में 1995 से बालकों में संस्कार, शिवार्चन प्रकाशन, गीता कार्यकर्ता का सेवा कार्य। गीता और वेदांत का अध्ययन किया है। पूज्य गुरुदेव के आशीर्वाद से 2 जून 2021 से श्रीलालेश्वर महादेव मंदिर में महंत का दायित्व संभाल रहे हैं।

 

 

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