पशुपालकों की उन्नति के लिए योजनाबद्ध ढंग से कार्य किए जाने की जताई आवश्यकता
बीकानेरNidarindia.com राजस्थान पशुचिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह मंगलवार को आयोजित किया गया। इस अवसर पर राज्यपाल कलराज मिश्र वर्चुअल रूप से समारोह में षामिल हुए।

उन्होने पशुपालकों की उन्नति और उनकी आय में वृद्धि के लिए योजनाबद्ध ढंग से कार्य किए जाने की आवश्यकता जताई है। उन्होंने पशुचिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के अतंर्गत इस तरह के पाठ्यक्रम विकसित किए जाने पर जोर दिया जिससे पशुधन संरक्षण के साथ ही इनके उत्पादों के पोषण में भी गुणात्मक वृद्धि हो। उन्होंने कहा कि पशुण्धन संरक्षण से जुड़े परम्परागत मूल्यों का आधुनिकता से मेल कराते हुए इस क्षेत्र में उपचार की नवीन पद्धतियों का विकास करना होगा, तभी दवाओं व अन्य तत्वों की अधिकता से पशुधन और पशु उत्पादों पर होने वाले दुष्प्रभावों से बचा जा सकता है।
राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा कि राज्य के एकमात्र पशु चिकित्सा एवं पशुविज्ञान विश्वविद्यालय के रूप में इस विश्वविद्यालय ने अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने सुझाव दिया कि विश्वविद्यालय को पशुधन संरक्षण के साथ ही उत्पादकता वृद्धि के आधुनिक तरीकोंए पशु उत्पादों के प्रसंस्करणए विपणन आदि के क्षेत्र में भी नवीन पाठ्यक्रम शुरू करने चाहिए।
उन्होंने कहा कि पशु विज्ञान केन्द्रों के माध्यम से किसान व पशुपालकों तक नवीनतम उन्नत वैज्ञानिक तकनीकों की सरल व सहज जानकारी हस्तांतरित की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि पशुचिकित्सा और पशु विज्ञान पुरुषों के वर्चस्व का क्षेत्र माना जाता रहा हैए किन्तु आज यहां 65 फीसदी पदक छात्राओं को मिलना एक शुभ संकेत है।
इनको मिली उपाधियां…

दीक्षान्त समारोह के अवसर पर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले 21 विद्यार्थियों को पदक और 331 विद्यार्थियों को स्नातकए 96 को स्नातकोत्तर एवं 34 विद्यार्थियों को पीएचडी की उपाधियां प्रदान की गई। प्रो एमएल मदन को इस अवसर पर विश्वविद्यालय की ओर से डॉक्टर ऑफ साइन्स की मानद उपाधि प्रदान की गई।
पशुपालकों को मिले सुविधाएं…
दीक्षांत अतिथि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के पूर्व उपमहानिदेशक पशु विज्ञान प्रो. एमएल मदन ने कहा कि भारत की कृषि पशुधन आधरित है। देश में मानव जनसंख्या के मुकाबले पशुधन की संख्या आधी हैए जबकि राजस्थान में पशुधन की संख्या जनसंख्या की तुलना में दोगुनी है। उन्होंने इस स्थिति का लाभ उठाने के लिए पशुपालकों को अधिकाधिक सुविधाएं दिए जाने का सुझाव दिया।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के उपमहानिदेशक पशु विज्ञानद्ध डॉ.बीएन त्रिपाठी ने कहा कि पशु चिकित्सा विज्ञान से जुड़े विशेषज्ञों और विद्यार्थियों को पशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में सामने आ रही नई चुनौतियों के लिए तैयार रहने की जरूरत है।
कुलपति प्रो सतीश कुमार गर्ग ने विश्वविद्यालय का प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए विद्यार्थियों की अकादमिक एवं सहण् शैक्षणिक उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी । उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में देशी गोवंश की नस्लों राठी, थारपारकर, गिर, साहीवाल, कांकरेज और मालवी के विकास के लिए निरंतर शोध कार्य किया जा रहा है ।
राज्यपाल ने समारोह के आरम्भ में भारतीय संविधान की प्रस्तावना और मूल कर्तव्यों का वाचन किया। इस अवसर पर विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतिगण, विश्वविद्यालय प्रबंध मंडल एवं अकादमिक परिषद् के सदस्यगण, विश्वविद्यालय के शिक्षकगण एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।






